हरियाणा में गूँजी गीता की दिव्य वाणी, संस्कृति–आस्था का अनूठा संगम
मंच से पूरे देश में गया सकारात्मकता, कर्मयोग व आत्मविश्वास का संदेश
जींद : अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के अंतर्गत आज ऐतिहासिक गांव रामराय स्थित तीर्थ स्थल पर भव्य उत्सव श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक वैभव के साथ मनाया गया। सुबह से ही पूरा क्षेत्र शंखनाद, भजन-कीर्तन और लोक संगीत की पवित्र धुनों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस आध्यात्मिक आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया। कार्यक्रम में आए कलाकारों ने कृष्ण रास, कान्हा गुजरिया, भजन और हरियाणवी लोक रंग से सजी प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्होंने दर्शकों को प्रभु भक्ति में सराबोर कर दिया। दर्शकों ने तालियों और जयकारों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
गीता फिर दुनिया की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति बने—अशोक छाबड़ा

“अब हम गीता पढ़ेंगे नहीं, गीता बनकर जीएँगे” — अशोक छाबड़ा
मंच से उन्होंने आह्वान किया कि “हम हर व्यक्ति को एक-एक गीता श्लोक सिखाएँगे। नफरत नहीं, प्रेम बाँटेंगे। डरेंगे नहीं, मुकाबला करेंगे।”उन्होंने कहा कि गीता आज भी उतनी ही जीवंत, प्रासंगिक और हर समस्या का सरल समाधान है। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने कलाकार अमन व उनकी टीम का सम्मान किया और उनकी प्रस्तुतियों को सराहा।
ग्रामीणों ने व्यक्त किया धन्यवाद

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