श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म पर झूम उठे श्रद्धालू

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श्रीमद् भागवत कथा
श्रीमद् भागवत कथा

नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयघोष से गूंज उठा पांडाल 

जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है,

तब-तब भगवान अवतरित होते हैं: कैवल्यानंद सरस्वती

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : श्री कृष्ण भक्ति भागवत समिति के तत्वावधान में नगर के ऐतिहासिक नागक्षेत्र मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म का भव्य आयोजन किया गया। कथा में कथावाचक स्वामी कैवल्यानंद सरस्वती महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। जैसे ही कथा में वासुदेव जी नवजात श्रीकृष्ण जी को लेकर कथा स्थल पर पहुंचे तो श्रद्धालु झूम उठे। श्रद्धालुओं नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयघोष से पांडाल गुंज उठा।

भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म की झांकी।
भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म की झांकी।

इस मौके पर श्रीजन्म की खुशी में बधाई गाई गई और प्रसाद वितरित किया गया। व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कथावाचक स्वामी कैवल्यानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार और पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। कथा व्यास ने कहा कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा।

सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वह स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा वाचक ने कहा कि भादोमास की अंधियारी रात को अष्टमी के दिन कंस के मथुरा जेल में अचानक अलौकिक प्रकाश फैलने लगा और माता देवकी के गर्भ से श्री कृष्ण का जन्म हुआ।

श्रीकृष्ण जन्म पर झूमते हुए श्रद्धालु।
श्रीकृष्ण जन्म पर झूमते हुए श्रद्धालु।

वहां के समस्त बंदी मूर्छित हो गए जेल के दरवाजे खुल गए आकाशवाणी हुई जिसे सुनकर वासुदेव नन्हे बालक रूप में लेकर यमुनापार गोकुल नंद के घर पहुंचकर वहां से नवजात कन्या को लेकर वापस आए। सुबह होते ही गोकुल में नंद बाबा के घर बालक जन्म होने की बात पता चलते ही उत्सव मनाया जाने लगा।

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