कार्यालयी फैसलों में दबाव अस्वीकार्य, स्टाफ को लिखित निर्देश
राज्य के ऊर्जा वितरण तंत्र से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल के दिनों में बढ़ती सिफारिशी गतिविधियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विभागीय कामकाज में बार-बार बाहरी प्रभाव डालने की कोशिशों से नाराज़ अधिकारी ने अधीनस्थ स्टाफ को लिखित संदेश जारी कर साफ कर दिया है कि अब इस तरह के तरीकों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह संदेश कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
पत्र में अधिकारी ने संकेत दिया है कि तबादलों, ड्यूटी बदलाव, अवकाश या अन्य प्रशासनिक निर्णयों में अनुचित दबाव बनाने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। खास तौर पर प्रभावशाली लोगों के जरिए संपर्क करवाकर फैसले अपने पक्ष में कराने की कोशिशें विभागीय अनुशासन को कमजोर कर रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में यह चेतावनी जारी की गई है कि यदि भविष्य में किसी ने भी इस तरह का रास्ता अपनाया, तो उसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारी का कहना है कि विभागीय प्रक्रियाएं तय नियमों और योग्यता के आधार पर चलनी चाहिए। बाहरी दखल न केवल काम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल भी तोड़ता है। इसलिए अब हर फैसले को नियम पुस्तिका और रिकॉर्ड के आधार पर ही लिया जाएगा।
इस निर्देश के बाद कर्मचारियों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी और कामकाज सुचारू होगा। वहीं कुछ कर्मचारी इसे बेहद सख्त कदम मान रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से सिफारिशों के जरिए काम निकलवाने की परंपरा चली आ रही थी।
जानकारों का कहना है कि यदि इस आदेश को सख्ती से लागू किया गया, तो यह विभागीय संस्कृति में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे एक ओर जहां राजनीतिक या बाहरी दबाव कम होगा, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने में भी आसानी होगी। कुल मिलाकर, यह संदेश स्पष्ट करता है कि अब प्रशासनिक फैसलों में अनुशासन और नियम सर्वोपरि रहेंगे।
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