सूरजकुंड मेले में हादसे के बाद व्यापार ठप, सैकड़ों परिवारों की रोजी पर असर

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Surajkund Mela

दुकानें और झूले बंद होने से बढ़ी चिंता, छोटे व्यापारियों की मेहनत पर लगा ब्रेक

फरीदाबाद के सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में हुए हादसे के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। सुरक्षा कारणों से प्रशासन द्वारा 72 दुकानों और 14 झूलों को बंद किए जाने के फैसले ने सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर डाला है। मेले में रोजगार से जुड़े करीब 800 परिवार अचानक आर्थिक संकट में घिर गए हैं।

दुकानदारों का कहना है कि वे इस मेले के लिए महीनों पहले से तैयारी करते हैं। कई व्यापारियों ने बैंक और निजी स्रोतों से कर्ज लेकर सामान खरीदा था, वहीं कुछ ने लाखों रुपये किराया और स्टॉल शुल्क के रूप में जमा किए। अब अचानक दुकानें बंद होने से न तो लागत निकल पा रही है और न ही कर्ज चुकाने का रास्ता नजर आ रहा है।

झूला संचालकों की स्थिति भी अलग नहीं है। भारी निवेश के बाद झूले लगाए गए थे, लेकिन संचालन बंद होने से रोजाना का खर्च और कर्मचारियों की मजदूरी देना मुश्किल हो गया है। कई परिवार ऐसे हैं, जिनकी सालभर की आमदनी का बड़ा हिस्सा इसी मेले पर निर्भर रहता है।

व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक समाधान निकाला जाए, ताकि उनकी आजीविका पूरी तरह प्रभावित न हो। उनका कहना है कि यदि पूरी तरह संचालन संभव नहीं है, तो आंशिक रूप से या सुरक्षित दायरे में दुकानों को खोलने की अनुमति दी जाए।

वहीं प्रशासन का तर्क है कि हादसे के बाद सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता। संबंधित विभागों द्वारा जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

इस बीच दुकानदारों और कारीगरों में निराशा और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। सूरजकुंड मेले जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में रोजगार से जुड़े लोगों की यह स्थिति सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

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