जुलाना के कुम्हारों की गुहार, आजीविका बचाने के लिए जमीन की मांग

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Julana Potters

मंत्री गंगवा से मिले कुम्हार समाज के लोग, बोले– मिट्टी बिना हुनर अधूरा

हरियाणा के जुलाना क्षेत्र में कुम्हार समाज ने अपनी पारंपरिक आजीविका को बचाने के लिए सरकार से जमीन उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। इस संबंध में कुम्हारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री गंगवा से मुलाकात कर अपनी समस्याएं साझा कीं। समाज के लोगों ने कहा कि बर्तन बनाने के लिए मिट्टी उनका मूल आधार है, लेकिन वर्षों से वे जिस जमीन से मिट्टी लेते आ रहे थे, उस पर अब उनका कोई अधिकार नहीं रहा।

कुम्हारों ने बताया कि पीढ़ियों से वे मिट्टी के बर्तन, दीपक और अन्य घरेलू सामान बनाकर अपना जीवन यापन करते आए हैं। बदलते समय में पहले ही इस पारंपरिक पेशे पर संकट गहराता जा रहा है, ऊपर से मिट्टी की उपलब्धता न होने से उनका काम लगभग ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। कई जगहों पर जमीन निजी स्वामित्व में चली गई है, जिससे कुम्हारों को वहां से मिट्टी लेने से रोका जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को अवगत कराया कि उन्हें आज तक मिट्टी वाली जमीन पर मालिकाना हक नहीं दिया गया, जबकि यही जमीन उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र साधन है। कुम्हार समाज का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाली पीढ़ियां इस पारंपरिक कला से पूरी तरह कट जाएंगी।

मंत्री गंगवा ने कुम्हारों की बात को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि उनकी समस्या पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के हितों के प्रति संवेदनशील है और संबंधित विभागों से रिपोर्ट लेकर समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

कुम्हार समाज के लोगों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांग को समझेगी और उन्हें मिट्टी उपलब्ध कराने के लिए जमीन आवंटन या वैकल्पिक व्यवस्था करेगी। उनका कहना है कि जमीन मिलने से न केवल उनका रोजगार बचेगा, बल्कि पारंपरिक भारतीय कुम्हार कला भी जीवित रह सकेगी

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