ब्रह्माकुमारीज द्वारा महाशिवरात्रि पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा

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Mahashivratri celebration

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सफीदों सैंटर के तत्वावधान में महाशिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सफीदों सैंटर इंचार्ज बहन स्नेहलता ने की। समारोह में बतौर मुख्यातिथि ऐशियाई कबड्‌डी महासंघ के चेयरमैन गुलाब सैनी व मुख्य वक्ता के रूप में राजयोगी भ्राता भारतभूषण ने शिरकत की। वहीं महामंडलेश्वर कमल किशोर महाराज का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। इस मौके पर विशेष भव्य शोभायात्रा निकाली गई। अतिथियों ने शोभायात्रा को ध्वज दिखाकर रवाना किया। यह यात्रा नगर के अनेक बाजारों व मोहल्लों से होकर गुजरी। यात्रा का नगर के अनेक स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया। इस यात्रा में 108 बहनें अपने सिर पर कलश उठाए हुई थी।

शोभायात्रा में शामिल शिवलिंग की झांकी।

यात्रा में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम व घुश्मेश्वर की झांकियों को विशेष रूप शामिल किया गया। यात्रा में बज रहे भजनों ने माहौल को शिवमय व भक्तिमय बना दिया। अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि शिवरात्रि का अर्थ है-शिव की रात्रि। यह रात्रि अंधकार का प्रतीक है। वर्तमान समय मानवीय, नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की घोर अवहेलना हो रही है। मन विकारों से दूषित है। इस समय की अवधि को शास्त्रों में धर्म ग्लानि या अधार्मिकता के रूप में वर्णन किया गया है। शिवरात्रि का दिव्य संदेश यह है कि परमपिता परमात्मा शिव अब एक बार फिर घोर अंधियारे की इस लंबी रात्रि में अवतरित हुए हैं। वे इस धरती के दु:ख और अशांति को मिटाने आए हैं। इस दिन आत्मा को पवित्र बनाने के लिए हर प्रकार की अपवित्रता को त्यागने का संकल्प करना चाहिए। भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाना मन, वचन और कर्म द्वारा भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। शिवरात्रि यथार्थ अर्थ को जीवन में धारण करने का समय है। महाशिवरात्रि का पर्व आत्मा और परमात्मा के मिलन का महाकुंभ है।

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