नशा तस्करी मामले में फैसला, जेल में बिताई अवधि को ही सजा माना

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Karnal court order

अदालत ने लगाया जुर्माना, आरोपी की रिहाई के निर्देश

करनाल में नशीले पदार्थों की आपूर्ति से जुड़े एक मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि आरोपी पहले ही पर्याप्त समय न्यायिक हिरासत में बिता चुका है, जिसे सजा के रूप में पर्याप्त माना गया। इसके साथ ही उस पर आर्थिक दंड भी लगाया गया।

मामला अवैध नशीले पदार्थ की सप्लाई से संबंधित था, जिसमें आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। अभियोजन पक्ष ने बरामदगी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध करने का प्रयास किया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी लंबे समय से हिरासत में है और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए नरमी बरती जाए।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को ही सजा (अंडरगोन) माना जाता है। साथ ही नियमानुसार जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया गया। जुर्माना जमा करने के बाद आरोपी को रिहा करने के आदेश जारी किए गए।

कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालत परिस्थितियों, अपराध की प्रकृति और आरोपी के पूर्व रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार का निर्णय ले सकती है। यह फैसला न्यायालय के विवेकाधिकार के अंतर्गत आता है।

फिलहाल आदेश के बाद संबंधित जेल प्रशासन को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर रिहाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए

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