पानीपत में किसानों को गांव-गांव जाकर किया जा रहा जागरूक: पराली प्रबंधन और कृषि यंत्रों पर 70% तक सब्सिडी की जानकारी

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पानीपत में कृषि विभाग की टीमों ने किसानों को पराली न जलाने के लिए गांव-गांव जाकर जागरूक करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

कृषि विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बैठकें कर किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS), रोटावेटर और मल्चर जैसे कृषि यंत्रों के उपयोग की जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया गया कि सरकार की ओर से पराली प्रबंधन से जुड़े कृषि यंत्रों पर 50% से लेकर 70% तक सब्सिडी दी जा रही है, ताकि किसान आसानी से इन मशीनों को खरीद सकें।

अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने की बजाय आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें। इससे न केवल फसल अवशेष का सही प्रबंधन होगा, बल्कि अगली फसल की पैदावार भी बेहतर होगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि पराली जलाने पर जुर्माने का प्रावधान है, इसलिए किसान जागरूक होकर सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएं।

कृषि विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में जागरूकता अभियान और तेज किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान पर्यावरण संरक्षण और उन्नत खेती की दिशा में कदम बढ़ा सकें।

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