अदालत का फैसला, मृत हेड कांस्टेबल की संपत्ति पर पत्नी का अधिकार बरकरार
चंडीगढ़ की एक अदालत ने मृत हेड कांस्टेबल की संपत्ति से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामले में बहन की ओर से दावा किया गया था कि मृतक का वैवाहिक संबंध समाप्त हो चुका था और पंचायत स्तर पर तलाक हो गया था। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि वैधानिक प्रक्रिया के बिना पंचायत का निर्णय कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि विवाह विच्छेद का कोई वैध न्यायिक आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया, इसलिए पत्नी का वैधानिक दर्जा बरकरार रहेगा। इस आधार पर मृतक की पत्नी को ही कानूनी वारिस माना गया है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि भले ही विवाह लंबे समय तक नहीं चला हो, लेकिन जब तक सक्षम अदालत द्वारा तलाक की विधिवत डिक्री जारी नहीं होती, वैवाहिक संबंध कायम रहता है।
बहन की ओर से दलील दी गई थी कि पारिवारिक स्तर पर समझौते के बाद दोनों अलग रह रहे थे, इसलिए संपत्ति पर उसका भी अधिकार बनता है। परंतु न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय स्पष्ट करता है कि व्यक्तिगत कानून और संपत्ति के मामलों में केवल अदालत द्वारा पारित आदेश ही मान्य होते हैं। पंचायत या सामाजिक स्तर पर हुए निर्णय, जब तक विधिक प्रक्रिया से प्रमाणित न हों, उत्तराधिकार संबंधी अधिकार तय नहीं कर सकते।
इस फैसले के बाद मृतक की पत्नी को सेवा लाभ और अन्य संपत्ति संबंधी दावों पर अधिकार मिल सकेगा।
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