ढाबों ने बदला खाना बनाने का तरीका
हरियाणा के प्रसिद्ध फूड हब मुरथल में इन दिनों कमर्शियल गैस की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। गैस सप्लाई प्रभावित होने के कारण ढाबा संचालकों को अपनी रसोई व्यवस्था में बदलाव करना पड़ रहा है। कई ढाबों पर अब पारंपरिक भट्ठियों पर खाना पकाया जा रहा है, जबकि कुछ जगहों पर इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है।
ढाबा संचालकों के अनुसार, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की नियमित सप्लाई न मिलने से परेशानी बढ़ गई है। स्थिति यह है कि गैस का उपयोग लगभग 70 प्रतिशत तक कम हो गया है। ऐसे में ग्राहकों को सेवा जारी रखने के लिए वैकल्पिक इंतजाम करना जरूरी हो गया है।
कई ढाबों ने मिट्टी की भट्ठियों या लकड़ी से चलने वाले चूल्हों पर खाना बनाना शुरू कर दिया है। इससे खाना पकाने की प्रक्रिया थोड़ी धीमी जरूर हो गई है, लेकिन ढाबा मालिकों का कहना है कि ग्राहकों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
कुछ ढाबा संचालकों ने बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हे भी मंगवाए हैं, ताकि गैस की कमी का असर कम किया जा सके। हालांकि बड़े पैमाने पर खाना बनाने में इंडक्शन चूल्हों का उपयोग आसान नहीं होता, फिर भी इसे अस्थायी समाधान के तौर पर अपनाया जा रहा है।
ढाबा मालिकों का कहना है कि यदि गैस सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है। मुरथल के ढाबे देशभर में अपने स्वाद और परंपरागत भोजन के लिए मशहूर हैं, इसलिए यहां रोज बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
व्यापारियों ने संबंधित एजेंसियों से जल्द से जल्द गैस सप्लाई बहाल करने की मांग की है, ताकि रसोई व्यवस्था फिर से सामान्य तरीके से चल सके और कारोबार प्रभावित न हो।
![]()











