होटल संचालक वैकल्पिक इंतजामों पर निर्भर
हरियाणा के कई शहरों और कस्बों में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध न होने के कारण खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों ने अब खाना बनाने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। कई जगहों पर संचालक डीजल से चलने वाली भट्ठियों और पारंपरिक तंदूर का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनके खर्च और कामकाज की प्रक्रिया दोनों प्रभावित हो रही हैं।
होटल और ढाबा संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से गैस एजेंसियों में सिलेंडर की बुकिंग तो की जा रही है, लेकिन डिलीवरी समय पर नहीं मिल रही। कई व्यापारियों ने बताया कि रसोई गैस की कमी के कारण रोजाना के संचालन में कठिनाई आ रही है। मजबूरी में उन्हें डीजल भट्ठियों या लकड़ी से चलने वाले तंदूर का उपयोग करना पड़ रहा है, जो गैस के मुकाबले महंगा और समय लेने वाला विकल्प है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो खाने-पीने के सामान की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है। उनका तर्क है कि वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल से लागत बढ़ रही है, जिसका असर सीधे ग्राहकों पर पड़ सकता है। हालांकि अभी कई संचालक ग्राहकों को परेशानी से बचाने के लिए कीमतें बढ़ाने से बच रहे हैं।
खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों ने संबंधित विभागों से मांग की है कि गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को जल्द सामान्य किया जाए ताकि होटल और ढाबों का संचालन सुचारू रूप से चल सके। उनका कहना है कि छोटे स्तर पर काम करने वाले व्यापारियों के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है, क्योंकि उनके पास लंबे समय तक वैकल्पिक ईंधन का खर्च उठाने की क्षमता नहीं है।
यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर न केवल होटल उद्योग पर पड़ेगा बल्कि आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।
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