सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ी हलचल
हरियाणा में ऊपरी सदन की सीट के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू होते ही राजनीतिक माहौल काफी सक्रिय हो गया है। प्रदेश की राजनीति में इस चुनाव को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। सुबह से ही विधायकों के आने-जाने का सिलसिला जारी है और चंडीगढ़ स्थित विधानसभा परिसर में हलचल तेज हो गई है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेते हुए सबसे पहले अपना मताधिकार का प्रयोग किया। उनके मतदान के बाद अन्य विधायकों का भी विधानसभा पहुंचना शुरू हो गया। सत्तारूढ़ दल ने अपने सभी विधायकों को सुबह ही विधानसभा पहुंचने के निर्देश दिए थे ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी की जा सके। पार्टी नेतृत्व लगातार अपने विधायकों के संपर्क में बना हुआ है और किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए रणनीति बनाई गई है।
वहीं विपक्षी दल के कई विधायक भी कसौली से सीधे चंडीगढ़ पहुंचे। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ दिनों से एक साथ रह रहे थे ताकि पार्टी एकजुटता बनी रहे। विधानसभा पहुंचने के बाद उन्होंने भी मतदान में भाग लिया। विपक्ष की ओर से भी अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने की पूरी कोशिश की जा रही है।
इस बीच क्षेत्रीय दल की ओर से चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो चुनावी समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के परिणाम प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं।
मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए विधानसभा परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन की टीमों को सतर्क रखा गया है। जैसे-जैसे मतदान आगे बढ़ रहा है, सभी दलों की निगाहें नतीजों पर टिकी हुई हैं। परिणाम आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि किस दल की रणनीति कितनी सफल रही।
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