चंडीगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिजली वितरण व्यवस्था के टेकओवर से पहले का बकाया उपभोक्ताओं से वसूल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नई बिजली वितरण कंपनी ट्रांसफर की तारीख से पहले के लंबित बिलों की रिकवरी करने की अधिकार नहीं रखती।
इस फैसले के बाद हजारों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिन्हें पुराने बकाया भुगतान को लेकर नोटिस या दबाव का सामना करना पड़ रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि टेकओवर से पहले की देनदारियां नई कंपनी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं, इसलिए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना गलत है।
हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी उपभोक्ता से वही राशि वसूली जा सकती है जो ट्रांसफर डेट के बाद की अवधि से संबंधित हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुरानी देनदारियों को लेकर उपभोक्ताओं को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। फैसले के बाद बिजली उपभोक्ताओं में संतोष का माहौल देखा गया।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए अहम मिसाल साबित हो सकता है, जहां किसी सेवा या विभाग के हस्तांतरण के बाद पुराने बकाए को लेकर विवाद सामने आते हैं। वहीं उपभोक्ता संगठनों ने भी फैसले का स्वागत करते हुए इसे आम लोगों के हित में बताया है।
दूसरी ओर संबंधित बिजली वितरण कंपनी की तरफ से अभी इस फैसले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि माना जा रहा है कि अदालत के आदेश के बाद बिलिंग और रिकवरी प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। आने वाले समय में इस फैसले का असर शहर के बड़ी संख्या में बिजली उपभोक्ताओं पर देखने को मिल सकता है।
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