नारनौल की ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले शोभा सागर के सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने करीब 3.78 करोड़ रुपए की लागत से इस ऐतिहासिक स्थल के विकास के लिए टेंडर जारी कर दिया है। परियोजना के तहत शोभा सागर क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक संरचनाओं के साथ विकसित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्य लगभग आठ माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
शोभा सागर का इतिहास 17वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ माना जाता है और यह क्षेत्र लंबे समय से स्थानीय लोगों व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। समय के साथ रखरखाव की कमी और अव्यवस्थित स्थिति के कारण इसकी चमक फीकी पड़ गई थी। अब सरकार और प्रशासन इसे नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी में हैं ताकि इसकी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित किया जा सके।
परियोजना के तहत परिसर में सौंदर्यीकरण, पाथवे निर्माण, बैठने की व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही आसपास के क्षेत्र को पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक और सुविधाजनक बनाने की योजना भी तैयार की गई है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि शोभा सागर के विकास से शहर की सुंदरता बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
PWD अधिकारियों के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। विभाग ने तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं ताकि लोगों को जल्द नई सुविधाओं का लाभ मिल सके।
इस परियोजना से नारनौल की ऐतिहासिक पहचान को नया जीवन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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