हरियाणा में सरकारी कॉलेजों के लिए किताबों की खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के बाद सरकार ने 8 पब्लिशर्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद अब राज्य के सरकारी कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में इन प्रकाशकों की पुस्तकें नहीं खरीदी जा सकेंगी।
जानकारी के अनुसार CAG रिपोर्ट में किताबों की खरीद से जुड़े कई मामलों में नियमों के उल्लंघन और प्रक्रियागत खामियों की ओर संकेत किया गया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ मामलों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी देखने को मिली। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने मामले की समीक्षा कर संबंधित प्रकाशकों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक ब्लैकलिस्ट किए गए पब्लिशर्स को भविष्य की खरीद प्रक्रियाओं से बाहर कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण और नियमों के अनुरूप पुस्तकें उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से यह सख्त कदम उठाया गया है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकारी कॉलेजों में पुस्तक खरीद की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नई निगरानी व्यवस्था भी लागू की जा सकती है। साथ ही भविष्य में खरीद प्रक्रिया के दौरान सभी नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। कई शिक्षाविदों ने इसे पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में जरूरी कदम बताया है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पुस्तक चयन और खरीद प्रक्रिया में तकनीकी सुधार की भी आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की संभावना कम हो सके।
फिलहाल विभाग आगे की जांच और प्रक्रियात्मक सुधारों पर काम कर रहा है।
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