डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर आया है। करीब दो महीने बाद मिली पैरोल-फरलो के बाद वह कड़ी सुरक्षा के बीच सिरसा स्थित डेरे पहुंचा। इस दौरान उसके काफिले में लैंड क्रूजर और फॉर्च्यूनर समेत कई गाड़ियां शामिल रहीं। बताया जा रहा है कि यह 17वीं बार है जब राम रहीम को पैरोल या फरलो के जरिए जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है।
जेल से बाहर आने के बाद राम रहीम सड़क मार्ग से सिरसा के लिए रवाना हुआ। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए उसके काफिले के साथ पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मी भी तैनात रहे।
सिरसा डेरे में उसके पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद अनुयायियों के बीच भी हलचल बढ़ गई। डेरे और आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी गई।
राम रहीम को बार-बार मिलने वाली पैरोल और फरलो पहले भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय रही है। इस बार करीब दो महीने के अंतराल के बाद वह दोबारा जेल से बाहर आया है।
पैरोल और फरलो दोनों ही निर्धारित कानूनी एवं जेल नियमों के तहत दी जाने वाली अस्थायी रिहाई की व्यवस्थाएं हैं। अनुमति देते समय संबंधित प्रशासन और सक्षम अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है।
राम रहीम हरियाणा की जेल में सजा काट रहा है। उसे अलग-अलग मामलों में अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है। जेल से अस्थायी रिहाई के दौरान उसे प्रशासन द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होता है।
इस बार सिरसा डेरे पहुंचने के कारण प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो गई है। डेरे में बड़ी संख्या में अनुयायियों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए कानून-व्यवस्था पर निगरानी रखी जा सकती है।
राम रहीम के काफिले में महंगी SUV गाड़ियां दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। लैंड क्रूजर और फॉर्च्यूनर समेत वाहनों के काफिले के साथ वह सिरसा पहुंचा।
उसके डेरे पहुंचने के बाद वहां की गतिविधियों पर भी प्रशासन की नजर बनी रहेगी। पैरोल या फरलो के दौरान किन गतिविधियों की अनुमति होगी, यह संबंधित आदेश में तय शर्तों पर निर्भर करेगा।
राम रहीम को इससे पहले भी कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है। इसी वजह से हर बार उसकी अस्थायी रिहाई को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा शुरू हो जाती है।
कुछ पक्ष बार-बार मिलने वाली अस्थायी रिहाई पर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि प्रशासन की ओर से ऐसी अनुमति को निर्धारित जेल नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत दिए जाने की बात कही जाती रही है।
पैरोल या फरलो मिलना किसी कैदी की सजा समाप्त होना नहीं है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को नियमों के अनुसार वापस जेल जाना होता है।
इस दौरान यदि प्रशासन की ओर से कोई विशेष प्रतिबंध या शर्त लगाई गई है तो राम रहीम को उसका पालन करना होगा। उल्लंघन की स्थिति में सक्षम अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा राम रहीम का प्रमुख केंद्र है। लंबे समय से यहां बड़ी संख्या में उसके अनुयायी आते रहे हैं। इसलिए उसके पहुंचने पर आसपास सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है।
राम रहीम की रिहाई के समय और सिरसा पहुंचने तक पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। काफिले की आवाजाही के दौरान भी निगरानी की गई।
अब उसकी पैरोल-फरलो की अवधि के दौरान होने वाली गतिविधियों पर नजर रहेगी। प्रशासन के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि अनुमति में निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन किया जाए।
फिलहाल करीब दो महीने बाद राम रहीम फिर जेल से बाहर आकर सिरसा डेरे पहुंच चुका है। 17वीं बार मिली पैरोल-फरलो और लैंड क्रूजर-फॉर्च्यूनर के काफिले में उसकी वापसी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है।
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