पुलिस से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा रमेश अत्री आखिरकार अपनी ही योजना में फंस गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह एक के बाद एक छह राज्यों में छिपता रहा। पुलिस को चकमा देने के लिए वह अपनी लोकेशन बदलने से पहले फोन करता था और इसके बाद दूसरी जगह निकल जाता था। हालांकि यही तरीका बाद में पुलिस के लिए उस तक पहुंचने की अहम कड़ी बन गया।
जानकारी के मुताबिक पुलिस लंबे समय से रमेश अत्री की तलाश कर रही थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने किसी एक जगह ज्यादा समय तक नहीं रुकने की रणनीति अपनाई थी।
वह लगातार एक राज्य से दूसरे राज्य में जाता रहा। इस दौरान उसने छह राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर ठिकाने बनाए, ताकि पुलिस उसकी सही लोकेशन का पता न लगा सके।
अत्री को आशंका थी कि पुलिस उसके मोबाइल फोन के जरिए उस तक पहुंच सकती है। इसी कारण वह फोन के इस्तेमाल को लेकर भी सतर्क रहने की कोशिश करता था।
बताया जा रहा है कि किसी ठिकाने को छोड़ने से पहले वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता और इसके तुरंत बाद वहां से निकल जाता था। उसका मानना था कि जब तक पुलिस उस लोकेशन तक पहुंचेगी, तब तक वह दूसरी जगह जा चुका होगा।
शुरुआत में उसकी यह रणनीति पुलिस के लिए चुनौती बनी। मोबाइल की लोकेशन मिलने तक आरोपी वहां से आगे निकल चुका होता था। इससे पुलिस को बार-बार अलग-अलग जगहों पर उसकी तलाश करनी पड़ रही थी।
हालांकि लगातार एक ही पैटर्न दोहराने के कारण पुलिस को उसकी गतिविधियों को समझने में मदद मिली। जांच टीम ने फोन इस्तेमाल करने के समय और उसके बाद बदलने वाले संभावित ठिकानों का विश्लेषण शुरू किया।
तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस ने उसके मूवमेंट का पैटर्न तैयार किया। इससे यह अंदाजा लगाने में मदद मिली कि फोन करने के बाद वह किस दिशा में जा सकता है और अगला ठिकाना कहां हो सकता है।
पुलिस ने केवल मोबाइल लोकेशन पर निर्भर रहने के बजाय अन्य तकनीकी और जमीनी सूचनाओं को भी जांच में शामिल किया। उसके परिचितों और संभावित संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई गई।
अत्री जिन लोगों के संपर्क में था, उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखी गई। पुलिस यह समझने का प्रयास करती रही कि अलग-अलग राज्यों में उसे रहने और यात्रा करने में कौन मदद कर रहा था।
छह राज्यों में लगातार ठिकाने बदलने के कारण जांच टीम को अलग-अलग स्थानों पर समन्वय बनाना पड़ा। संबंधित क्षेत्रों की पुलिस से भी आवश्यक जानकारी साझा की गई होगी।
जांच के दौरान पुलिस ने उसके संभावित रास्तों और ठिकानों की सूची तैयार की। इसके बाद तकनीकी इनपुट के आधार पर टीमों को अलग-अलग स्थानों पर लगाया गया।
आखिरकार बार-बार फोन करने और उसके बाद लोकेशन बदलने की उसकी रणनीति ही पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग साबित हुई। गतिविधियों का पैटर्न समझ आने के बाद पुलिस उसके अगले कदम का अनुमान लगाने में सफल रही।
पुलिस की कार्रवाई के बाद रमेश अत्री को पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी के बाद अब उससे फरारी के दौरान इस्तेमाल किए गए ठिकानों और मदद करने वाले लोगों के संबंध में पूछताछ की जा सकती है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि छह राज्यों में फरारी के दौरान उसने किन लोगों से संपर्क किया और रहने तथा यात्रा की व्यवस्था किस तरह की।
यदि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर आरोपी को छिपने या पुलिस से बचने में मदद करने के साक्ष्य मिलते हैं तो उसकी भूमिका की भी कानून के अनुसार जांच की जा सकती है।
रमेश अत्री की गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। उनसे संपर्कों, यात्राओं और फरारी की पूरी टाइमलाइन तैयार करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल पुलिस से बचने के लिए छह राज्यों में ठिकाने बदलने वाला रमेश अत्री गिरफ्त में है। लोकेशन बदलने से पहले फोन करने की जिस रणनीति को वह पुलिस को चकमा देने का जरिया समझ रहा था, वही उसके मूवमेंट का पैटर्न पकड़ने में जांच टीम के काम आई।
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