करनाल में डायल-112 की पुलिस गाड़ी और बाइक के बीच हुई टक्कर में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद घायल युवक को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिजनों ने पुलिस वाहन के चालक पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि डायल-112 की गाड़ी रॉन्ग साइड से आ रही थी और उसकी हेडलाइट भी बंद थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जानकारी के अनुसार युवक बाइक से जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में डायल-112 की गाड़ी से उसकी बाइक की टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
हादसे के बाद मौके पर आसपास के लोग जमा हो गए। घायल युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद युवक के परिजन भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने हादसे के लिए पुलिस वाहन को जिम्मेदार ठहराते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिजनों का आरोप है कि हादसे के समय डायल-112 की गाड़ी सड़क पर गलत दिशा से आ रही थी। उनका कहना है कि यदि पुलिस वाहन निर्धारित दिशा में चल रहा होता तो दुर्घटना से बचा जा सकता था।
परिवार ने यह भी दावा किया कि पुलिस गाड़ी की हेडलाइट बंद थी। रात या कम रोशनी की स्थिति में हेडलाइट बंद होने से सामने से आने वाले वाहन चालक के लिए गाड़ी को समय रहते देखना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि पुलिस वाहन वास्तव में रॉन्ग साइड था या नहीं और उसकी हेडलाइट बंद थी या चालू, इन तथ्यों की पुष्टि घटनास्थल की जांच और अन्य साक्ष्यों से होगी।
पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल सकती है। फुटेज उपलब्ध होने पर हादसे से ठीक पहले दोनों वाहनों की दिशा और स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।
दुर्घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस उनसे पूछताछ कर यह पता लगा सकती है कि डायल-112 की गाड़ी किस दिशा से आ रही थी और टक्कर किन परिस्थितियों में हुई।
दोनों वाहनों को हुए नुकसान की स्थिति भी दुर्घटना की जांच में मददगार हो सकती है। तकनीकी निरीक्षण के जरिए टक्कर की दिशा और प्रभाव का आकलन किया जा सकता है।
परिजनों का कहना है कि सरकारी या पुलिस वाहन होने के कारण मामले की जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की मांग की है।
डायल-112 आपातकालीन सेवा से जुड़ी गाड़ियां विभिन्न घटनाओं की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचती हैं। हालांकि आपातकालीन परिस्थितियों में भी सड़क सुरक्षा और अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा का ध्यान रखना आवश्यक होता है।
पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि घटना के समय डायल-112 की गाड़ी किसी आपातकालीन कॉल पर जा रही थी या सामान्य आवाजाही में थी। वाहन के GPS और ड्यूटी रिकॉर्ड से इस संबंध में जानकारी मिल सकती है।
घायल युवक की मेडिकल रिपोर्ट भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। डॉक्टरों की रिपोर्ट से उसकी चोटों की गंभीरता और इलाज की स्थिति की जानकारी सामने आएगी।
परिवार के सदस्यों ने युवक के बेहतर उपचार के साथ मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है। हादसे के बाद परिजन उसकी हालत को लेकर चिंतित हैं।
फिलहाल परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप जांच के विषय हैं। किसी भी पक्ष की जिम्मेदारी CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और तकनीकी जांच के बाद ही तय की जा सकेगी।
करनाल में हुए इस हादसे के बाद पुलिस की डायल-112 गाड़ी की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि दुर्घटना कैसे हुई और इसमें यातायात नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ।
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