गुरुग्राम के जलभराव पर कांग्रेस-BJP आमने-सामने, सुरजेवाला और राव इंद्रजीत ने एक-दूसरे पर साधा निशाना

4
Gurugram Waterlogging

गुरुग्राम में बारिश के बाद हुए जलभराव को लेकर हरियाणा की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने आईटी हब गुरुग्राम को “बाढ़ हब” बना दिया है। वहीं केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने पलटवार करते हुए जलभराव की समस्या के लिए कांग्रेस के शासनकाल में हुए शहरी विकास और व्यवस्थाओं को जिम्मेदार ठहराया। दोनों नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप के बाद शहर की ड्रेनेज व्यवस्था एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है।

बारिश के बाद गुरुग्राम के कई इलाकों में सड़कों पर पानी भरने और यातायात प्रभावित होने की स्थिति सामने आई। कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

जलभराव के कारण लोगों को ऑफिस और अन्य स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हुई। सोशल मीडिया पर भी शहर की सड़कों और पानी में फंसे वाहनों के वीडियो तथा तस्वीरें साझा की गईं।

इसी स्थिति को लेकर रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने गुरुग्राम की पहचान आईटी हब के रूप में होने का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने इसे “बाढ़ हब” में बदल दिया है।

सुरजेवाला ने शहर के बुनियादी ढांचे और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से तर्क दिया गया कि लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार मानसून के दौरान होने वाले जलभराव का स्थायी समाधान नहीं कर सकी।

कांग्रेस नेता के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने मौजूदा जलभराव की समस्या के लिए कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुए विकास और उस समय की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।

राव इंद्रजीत के मुताबिक गुरुग्राम में कई समस्याओं की जड़ पुराने समय में हुई प्लानिंग से जुड़ी है। उनका कहना है कि शहर के तेजी से विस्तार के दौरान जल निकासी और आधारभूत संरचना पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

इस तरह गुरुग्राम में पानी भरने की समस्या अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गई है।

गुरुग्राम देश के प्रमुख कॉर्पोरेट और आईटी केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के कार्यालय हैं। ऐसे में बारिश के दौरान सड़कों पर पानी भरने और घंटों ट्रैफिक प्रभावित होने से शहर की बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठते हैं।

तेजी से हुए शहरीकरण के कारण गुरुग्राम में आबादी, वाहनों और निर्माण का दबाव भी लगातार बढ़ा है। इसका सीधा असर सड़क और ड्रेनेज जैसी व्यवस्थाओं पर पड़ता है।

शहर में जल निकासी के लिए कई एजेंसियां काम करती हैं। अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की कमी को भी समय-समय पर समस्या के एक कारण के रूप में उठाया जाता रहा है।

बारिश से पहले नालों और ड्रेनों की सफाई की जाती है, लेकिन तेज बारिश होने पर कई निचले इलाकों में पानी जमा होने की स्थिति फिर भी सामने आती है।

जलभराव से केवल ट्रैफिक प्रभावित नहीं होता, बल्कि घरों, दुकानों और अन्य संपत्तियों को भी नुकसान होने का खतरा रहता है। सड़क पर अधिक पानी होने से वाहनों के खराब होने और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है।

अब कांग्रेस मौजूदा सरकार से सवाल कर रही है कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया। दूसरी ओर भाजपा से जुड़े नेता समस्या की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों की ओर इशारा कर रहे हैं।

राजनीतिक आरोपों से अलग शहर के निवासियों के लिए मुख्य चिंता बारिश के पानी की जल्द निकासी और यातायात व्यवस्था को सामान्य करना है।

जलभराव के स्थायी समाधान के लिए ड्रेनेज क्षमता बढ़ाने, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों को सुरक्षित रखने और अनियोजित निर्माण पर नियंत्रण जैसे कदम महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

शहरी योजनाकारों के लिए गुरुग्राम की तेजी से बढ़ती आबादी के अनुसार बुनियादी ढांचे को विकसित करना भी बड़ी चुनौती है।

फिलहाल गुरुग्राम के जलभराव को लेकर सुरजेवाला और राव इंद्रजीत सिंह के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। कांग्रेस जहां भाजपा सरकार की मौजूदा व्यवस्था को जिम्मेदार बता रही है, वहीं भाजपा पक्ष समस्या की जड़ कांग्रेस शासनकाल की नीतियों में बता रहा है।

बारिश थमने के बाद पानी की निकासी हो सकती है, लेकिन हर मानसून में सामने आने वाली इस समस्या के स्थायी समाधान को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है।

Loading