शुकदेव जी के जन्म प्रसंग से श्रद्धालुओं को कराया भाव-विभोर नागक्षेत्र सरोवर प्रांगण में कथा सुनने उमड़ रहे श्रद्धालु नियमित श्रवण और चिंतन-मनन करना जरूरी : कैवल्यानंद सरस्वती

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Safidon
सफीदों, (एस• के• मित्तल) : श्री कृष्ण भक्ति भागवत समिति के तत्वावधान में पितृ-पक्ष के उपलक्ष्य में नगर के ऐतिहासिक नागक्षेत्र सरोवर प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में श्रद्धालु धार्मिक वातावरण में कथा का श्रवण कर रहे हैं। कथा के दौरान श्रीमद्भागवत व्यास पीठाधीश्वर परम स्वामी कैवल्यानंद सरस्वती महाराज ने श्रद्धालुओं को शुकदेव जी के जन्म का प्रसंग सुनाया और श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा प्रसंग का वर्णन करते हुए स्वामी कैवल्यानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा अमर कथा है। इसका श्रवण केवल धार्मिक आयोजन में शामिल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि कथा में बताए गए संदेशों को अपने जीवन में उतारना और उनका चिंतन-मनन करना भी आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से कथा सुनने और उसके प्रसंगों पर मनन करने का आह्वान करते हुए कहा कि जीवन में अनेक प्रकार की विघ्न-बाधाएं आती रहती हैं, लेकिन मनुष्य को अपनी धार्मिक दिनचर्या और नियमों को बनाए रखना चाहिए। नियमित रूप से कथा का श्रवण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक विचारों से जुड़ने का अवसर मिलता है। कथा के माध्यम से भगवान की भक्ति, और जीवन मूल्यों का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचता है। स्वामी कैवल्यानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में जीवन की भागदौड़ बढ़ गई है। व्यक्ति अपने दैनिक कार्यों और जिम्मेदारियों में व्यस्त रहता है। ऐसे समय में आध्यात्मिक और धार्मिक आयोजनों से जुड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धार्मिक कथा मनुष्य को कुछ समय के लिए सांसारिक व्यस्तताओं से अलग होकर आत्मचिंतन करने का अवसर देती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंगों में जीवन को बेहतर ढंग से जीने के लिए अनेक संदेश निहित हैं। कथा का श्रवण तभी सार्थक होता है, जब व्यक्ति उसमें बताए गए अच्छे विचारों को अपने आचरण में शामिल करने का प्रयास करे।

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