रावण का वध अहंकार पर धर्म की विजय का प्रतीक: मधुरेश दास महाराज

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Safidon News
सफीदों, (एस• के• मित्तल) : नगर की गुरुद्वारा गली स्थित श्री शिव शक्ति कृपा मंदिर में वेदाचार्य दंडी स्वामी डॉ. निगमबोध तीर्थ महाराज के परम सानिध्य में चल रहे सामूहिक संगीतमय श्री रामायण पाठ महोत्सव में श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ रही है। महोत्सव के दौरान अयोध्या से पधारे व्यास मधुरेश दास महाराज ने श्रीराम कथा के विभिन्न प्रसंगों का संगीतमय वर्णन करते हुए रावण वध और भगवान श्रीराम की चित्रकूट वापसी का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान मंदिर परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। व्यास मधुरेश दास महाराज ने कहा कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली महान प्रेरणा है। भगवान श्रीराम का चरित्र हमें सत्य, मर्यादा, त्याग, संयम और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि रावण अत्यंत विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद अपने अहंकार, अधर्म और गलत कर्मों के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। यही कारण है कि रावण वध को केवल एक असुर के अंत के रूप में नहीं, बल्कि अहंकार पर धर्म, असत्य पर सत्य और अधर्म पर मर्यादा की विजय के रूप में देखा जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य के भीतर जब अहंकार बढ़ने लगता है तो उसका विवेक कमजोर हो जाता है। रावण के पास ज्ञान और शक्ति दोनों थे, लेकिन उसने अपने ज्ञान का सदुपयोग नहीं किया। इसके विपरीत भगवान श्रीराम ने अपनी शक्ति का प्रयोग सदैव लोककल्याण और धर्म की रक्षा के लिए किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी रामायण के इन प्रसंगों की प्रासंगिकता उतनी ही है, जितनी त्रेतायुग में थी। कथा के दौरान महाराज ने भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त कराया। व्यास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज में प्रेम, सम्मान, सेवा तथा सद्भाव की भावना को मजबूत करने के लिए रामायण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना जरूरी है। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।

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