गुरुग्राम में 190 करोड़ के कथित जीएसटी घोटाले में सैफी बरी, विभाग आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं दे सका

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Gurugram News

गुरुग्राम। करीब 190 करोड़ रुपये के कथित जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट प्रकरण में मोहम्मद शमशाद सैफी को अदालत ने बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने विभाग की ओर से पेश गवाही और दस्तावेजों को आरोपों के समर्थन में अपर्याप्त पाया।

जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय की गुरुग्राम जोनल यूनिट ने दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी सैफी पर फर्जी और गैर-मौजूद कंपनियों के नेटवर्क में शामिल होने का आरोप लगाया था। शिकायत के अनुसार, वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति के बिना बिल जारी कर विभिन्न संस्थाओं को करीब 190 करोड़ रुपये का अनुचित इनपुट टैक्स क्रेडिट पहुंचाया गया था।

छह गवाहों की सूची, एक की गवाही
विभाग ने छह गवाहों की सूची दी थी, लेकिन केवल वरिष्ठ खुफिया अधिकारी रामाशीष शर्मा को पेश किया। आदेश के अनुसार, जिरह में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें कथित फर्जी राशि की सटीक व्यक्तिगत जानकारी नहीं थी। वह संबंधित ठिकानों पर तलाशी या छापेमारी करने वाली टीम में भी शामिल नहीं थे।

अदालत ने उनकी गवाही को अधूरा और अपर्याप्त माना। अन्य पांच गवाह पेश नहीं किए गए।

दस्तावेजी साक्ष्य साबित नहीं हुए
अदालत के सामने पंचनामा, बैंक विवरण, जीएसटी रिटर्न और संबंधित बिल जैसे प्राथमिक दस्तावेजी साक्ष्य साबित नहीं किए जा सके। शिकायत दाखिल करने का प्राधिकरण पत्र आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।

सैफी को इस मामले में 9 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था।

साक्ष्य के लिए मिले थे कई अवसर
आदेश के अनुसार, विभाग को आरोप तय होने से पहले साक्ष्य पेश करने के लिए मई 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच 20 से अधिक अवसर दिए गए। साक्ष्य पूरे नहीं होने पर अक्टूबर 2025 में गवाही का अवसर बंद कर दिया गया था।

अंतिम बहस की निर्धारित तारीखों और 17 अक्टूबर 2026 को निर्णय के दिन भी विभाग का प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए अदालत ने सैफी को राहत दी।

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