झज्जर जिले के बेरी में लगने वाले ऐतिहासिक पशु मेले में दूसरे राज्यों से व्यापारी और घोड़ा मालिक पहुंचने लगे हैं। हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब समेत कई राज्यों से लोग पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए यहां आते हैं। खास नस्ल के घोड़े और घोड़ियां मेले में आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इनकी कीमत हजारों से लेकर लाखों रुपए तक होती है।
मेले में घोड़ों की नस्ल, कद-काठी और अन्य विशेषताओं के आधार पर कीमत तय की जाती है। कई मालिक अपने कीमती घोड़ों को विशेष वाहनों में लेकर पहुंचते हैं। पशुपालकों और खरीदारों के लिए यह मेला कारोबार के साथ पुरानी परंपरा से जुड़ने का अवसर भी है।
स्थानीय निवासी रमेश चंद्र के अनुसार, बेरी के पशु मेले का इतिहास ब्रिटिश शासनकाल से जुड़ा है। उनका कहना है कि उस दौर में स्थापित मंडियों में बेरी की मंडी भी शामिल थी। यहां लंबे समय से पशुओं का व्यापार होता आ रहा है।
रमेश चंद्र ने बताया कि वर्ष 1876 में बेरी नगर पालिका के गठन के बाद मेले से होने वाली आय से पालिका कर्मचारियों को वेतन दिया जाता था। इस तरह मेले की कमाई का स्थानीय निकाय की आर्थिक व्यवस्था में भी योगदान रहा है। आज भी विभिन्न राज्यों से आने वाले व्यापारी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
वहीं, मेले में पहुंच रहे व्यापारियों को पुलिस ने सुरक्षा के प्रति सतर्क किया है। बेरी थाना प्रभारी योगेश कुमार ने अपील की कि किसी अनजान व्यक्ति से खाने-पीने की चीजें स्वीकार न करें। उन्होंने आशंका जताई कि असामाजिक तत्व परिचय बढ़ाकर खाद्य पदार्थों में नशीला पदार्थ मिलाने जैसी वारदात कर सकते हैं।
थाना प्रभारी ने कहा कि कोई संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें। दूसरे राज्यों से आने वाले व्यापारियों को विशेष सावधानी बरतने और खरीद-बिक्री के दौरान लेन-देन में सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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