कानूनी अड़चनों और शिकायतों के बीच बढ़ीं राजनीतिक हलचल, चुनाव आयोग की भूमिका पर नजर
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद गहराता नजर आ रहा है। नगर निगम उपचुनाव में आम आदमी पार्टी की रणनीति को कमजोर करने वाले पूर्व विधायक शोएब इकबाल के बेटे की विधानसभा सदस्यता अब संकट में पड़ती दिखाई दे रही है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों और शिकायतों के बाद उनकी विधायकी को लेकर कानूनी और संवैधानिक स्तर पर मंथन शुरू हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, चुनाव के दौरान कथित तौर पर नियमों के उल्लंघन और आचार संहिता से जुड़ी गतिविधियों को लेकर शिकायतें दर्ज की गई थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर मामला अब निर्वाचन से जुड़े उच्च स्तर तक पहुंच चुका है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास किए गए, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगा।
एमसीडी उपचुनाव में जिस तरह अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदले और परिणामों ने रुख पलटा, उसके बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया। कई राजनीतिक दल इस पूरे घटनाक्रम को साजिशन बताया जा रहा है, जबकि शोएब इकबाल परिवार की ओर से सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। उनका कहना है कि यह सब राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति में चुनाव आयोग और संबंधित संवैधानिक संस्थाएं सभी तथ्यों और सबूतों की गहन जांच कर रही हैं। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो विधायकी रद्द होने तक की कार्रवाई संभव है। वहीं, समर्थकों का मानना है कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक दबाव का परिणाम है।
इस घटनाक्रम ने दिल्ली की सियासत को एक बार फिर गर्मा दिया है। अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।
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