“फार्मा-लेबल के पीछे छिपा जाल: गाजियाबाद में अवैध दवा यूनिट पकड़ी गयी”

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गायबाजार की फैक्ट्री में त्वचा रोग की दवाओं के पैकेट तैयार — बड़े ब्रांड के लेबल पर उत्तर भारत में सप्लाई

गाजियाबाद के एक औद्योगिक इलाके में ऐसी अवैध दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है जहाँ त्वचा संबंधी दवाओं को बड़े ब्रांडों के लेबल और पैकेटिंग पर तैयार कर उत्तर भारत भर में सप्लाई किया जा रहा था। स्थानीय प्रशासन और दवा निरीक्षण टीम की संयुक्त रेड में संयंत्र से भारी मात्रा में फिनिश्ड प्रोडक्ट, कच्चा माल, पैकिंग मटेरियल और पैकिंग मशीनें जब्त की गईं।

तलाशी के दौरान मिली सामग्री में कई काउंटरफिट पैकेज, फर्जी बैच नंबर, नकली मानक/मान्यताएँ और लैबelling के भी प्रमाण शामिल हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि इन दवाओं में घटक/अनुपात असुरक्षित थे और कई बार दवाओं की गुणवत्ता जाँच पास करानी वाली रिपोर्ट भी बनावट में मिली। प्रारम्भिक जांच से पता चला है कि यह सप्लाई चैन थोक वितरकों और छोटे-छोटे रिटेलर्स के माध्यम से कम कीमत पर कई राज्यों तक पहुँचती थी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे उत्पादों के उपयोग से एलर्जी, त्वचा में ज्वलन, संक्रमण और सिस्टमिक साइड-इफेक्ट्स का गंभीर जोखिम होता है। स्थानीय प्रशासन ने जनता से अपील की है कि त्वचा-रोग संबंधी दवाइयाँ केवल मान्यता प्राप्त फार्मेसियों व तय ब्रांड के आधिकारिक चैनलों से ही खरीदी जाएँ और संदिग्ध पैकेजिंग, असामान्य कीमत या बिना बिल वाली दवाओं से दूरी रखें।

प्राथमिक क़ानूनी कार्रवाई में संयंत्र के संचालक व कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है, और मामलों के आधार पर दवाइयाँ और उपकरण सील कर दिये गये। स्वास्थ्य विभाग ने अब जब्त नमूनों की लैब जाँच के आदेश दिए हैं और एफडीए/ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी को सूचित कर वैधानिक धाराओं के तहत मुकदमा रजिस्टर करने को कहा गया है।

जांच अभी जारी है — अधिकारी सप्लाई चेन के अन्य कड़ियों और थोक-स्रोत तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बाजार में बचे संभावित संदिग्ध स्टॉक को भी जब्त किया जा सके और लोगो की सेहत को होने वाले जोखिम को रोका जा सके।

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