किसान नेताओं की सजा के विरोध में प्रदर्शन, पुलिस ने गेट बंद किए, बाद में लिया ज्ञापन
हिसार में तमिलनाडु सरकार के खिलाफ किसानों का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिला। तमिलनाडु में किसान नेताओं को सुनाई गई सजा के विरोध में विभिन्न किसान संगठनों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। किसानों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए सरकार के फैसले को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक कार्यालय पहुंचे और तमिलनाडु सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। उनका कहना था कि किसान नेताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखी थीं, लेकिन उन्हें सजा देकर सरकार ने किसानों की आवाज दबाने की कोशिश की है।
स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। जब किसान नेता मांग पत्र सौंपने के लिए आगे बढ़े तो पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मुख्य गेट बंद कर दिए। इससे प्रदर्शनकारियों में रोष फैल गया और उन्होंने पुलिस व प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई। किसानों ने कहा कि शांतिपूर्वक ज्ञापन देना उनका संवैधानिक अधिकार है।
कुछ देर तक चली नोकझोंक के बाद प्रशासनिक अधिकारी बाहर आए और किसानों से मांग पत्र स्वीकार किया। मांग पत्र में तमिलनाडु सरकार से किसान नेताओं की सजा रद्द करने, निष्पक्ष जांच कराने और किसानों के आंदोलनों को अपराध की तरह न देखने की मांग की गई।
किसान नेताओं ने कहा कि देशभर के किसान एकजुट हैं और किसी भी राज्य में किसानों के साथ अन्याय हुआ तो उसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हुआ, लेकिन किसानों का आक्रोश साफ नजर आया।
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