हांसी के जिला बनने के बाद सफीदों के लोगों की जागी उम्मीदें

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पत्रकारों को जानकारी देते हुए संघर्ष समिति के पदाधिकारीगण।

सफीदों को जिला बनाओं संघर्ष समिति की हुई बैठक 

 

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : हरियाणा सरकार द्वारा हांसी को जिला बनाने के बाद सफीदों के लोगों को भी जिला बनने की उम्मीदें जग गई हैं। इस कार्य के लिए गठित की गई सफीदों जिला बनाओं संघर्ष समिति फिर से एक्टिव हो गई है। संघर्ष समिति ने इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए नगर की पुरानी अनाज मंडी में बैठक की। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष सुभाष जैन ने की। इस अवसर पर समिति के संयोजक मनोज दीवान, महासचिव संजीव गौतम, लीगल एडवाईजर एडवोकेट हरीश वशिष्ठ, सत्यवान सैन, परसराम वत्स, दीपक चौहान व हिमलेश जैन उपस्थित रहे। बैठक में सफीदों को जिला बनाने के लिए आगे की गतिविधियों पर चर्चा की गई और अगली रणनीति बनाई गई। अपने संबोधन में समिति के अध्यक्ष सुभाष जैन ने कहा कि सरकार द्वारा हांसी को जिला बनाया गया है और अब इस दिशा में सफीदों के भी जिला बनने की उम्मीदें जगी हैं। सफीदों को जिला बनता हुआ हर नागरिक देखना चाहता है। सफीदों के विधायक रामकुमार गौतम भी इस दिशा में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्ही की मेहनत के फलस्वरूप सफीदों जिला बनने के रेस में आगे है। हालांकि संघर्ष समिति सफीदों को जिला बनवाने के लिए पिछले 20 वर्षों से संघर्षरत है। उन्होंने बताया कि संघर्ष समिति इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए हलके के हर गांव व शहर में जाकर जन जागरण अभियान चलाएगी। उसके बाद इस मसले पर सफीदों में विशाल सभा का आयोजन किया जाएगा। अध्यक्ष सुभाष जैन ने कहा कि सफीदों के लोग साथ दें और एकजूट होकर लड़ाई लड़े तो सफीदों एक दिन जिला जरूर बनेगा। यह लड़ाई सफीदों हलके के मान-सम्मान व आने वाले भविष्य को सुदृढ़ करने की लड़ाई है। वहीं संघर्ष समिति के संयोजन मनोज दीवान व महासचिव संजीव गौतम ने कहा कि सफीदों जिला बनने का हर कोरम पूरा करता है। सफीदों का ऐतिहासिक संबंध महाभारतकाल से हैं। यह धर्मभूमि राजा कुरु और पांडवों के शासन का हिस्सा रही है। जो आज भी नागक्षेत्र तीर्थ व खानसर चौंक पर स्थित सर्पदधि तीर्थ जैसी धरोहर को अपने आंचल में समेटे हुए है। सफीदों क्षेत्र वर्ष 1931 से ही रेलवे लाइन से जुड़ा हुआ हैं। सफीदों में लघु सचिवालय व न्यायिक परिसर का नवनिर्मित तीन मंजिला विशाल इमारत ढांचा तैयार है। सफीदों में नागरिक अस्पताल है। सफीदों में कई हुडा के कई सैक्टर बनाए गए है। सफीदों विधानसभा 1952 से बनने के बाद 1967 में तहसील का दर्जा मिला और उसके उपरांत 1980 से सफीदों को सब डिविजन घोषित किया गया। सफीदों में शिक्षा क्षेत्र में तीन राजकीय स्नातकोतर महाविद्यालय, एक नर्सिंग कॉलेज, उपमंडल के गांव खेड़ा खेमावती व गांव मुआना में दो आईटीआई, खेलकूद के लिए भव्य महाराजा जन्मेज्य खेल स्टेडियम के साथ गांव सिल्लाखेड़ी, गांगोली, हाट आदि में भी खेल स्टेडियम है। सफीदों के बीचोबीच हांसी ब्रांच नहर बह रही है। सफीदों में ब्रिटिश शासन काल से ही वर्ष 1938 से नगरपालिका, 1885 से डाक सेवा, 1920 से अनाज मंडी व फल मंडी, 1957 से दूरसंचार विभाग, बैंकिंग सेवाएं कार्य कर रहीं हैं।

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