डॉक्टर हत्याकांड में फोरेंसिक गवाही से बदली केस की दिशा

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डॉक्टर की हत्या में फोरेंसिक की गवाही ने तोड़ा बचाव: हार्ट फेल्योर की दलील खारिज

डॉक्टर हत्याकांड में अदालत में पेश हुई फोरेंसिक विशेषज्ञ की गवाही ने मामले की दिशा ही बदल दी। बचाव पक्ष जहां लगातार यह दलील दे रहा था कि डॉक्टर की मौत हार्ट फेल्योर के कारण हुई, वहीं फोरेंसिक डॉक्टर ने स्पष्ट रूप से सिर में लगी गंभीर चोट को मौत का वास्तविक कारण बताया। इस गवाही के बाद अभियोजन पक्ष का केस मजबूत होता नजर आया।

अदालत में फोरेंसिक विशेषज्ञ ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि मृतक के सिर पर गहरी चोट के स्पष्ट निशान पाए गए थे। उन्होंने कहा कि यह चोट सामान्य नहीं थी और इतनी गंभीर थी कि इससे ब्रेन डैमेज हुआ, जिसके चलते मौत हुई। फोरेंसिक डॉक्टर ने यह भी साफ किया कि अगर मौत हार्ट फेल्योर से होती, तो शरीर में ऐसे बाहरी और आंतरिक चोट के संकेत नहीं मिलते।

बचाव पक्ष ने गवाही को कमजोर करने के लिए करीब चार घंटे तक फोरेंसिक विशेषज्ञ से क्रॉस एग्जामिनेशन किया। इस दौरान उनसे मेडिकल साइंस, हार्ट अटैक और ब्रेन इंजरी से जुड़ी कई तकनीकी सवाल पूछे गए। हालांकि, फोरेंसिक डॉक्टर अपने बयान पर कायम रहे और हर सवाल का तथ्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जवाब दिया।

अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपियों ने जानबूझकर डॉक्टर के सिर पर वार किया, जिससे उनकी मौके पर ही हालत गंभीर हो गई थी। बाद में इलाज न मिलने और गंभीर चोट के कारण उनकी मौत हो गई। अभियोजन ने कहा कि फोरेंसिक साक्ष्य यह साबित करते हैं कि यह एक सुनियोजित हमला था, न कि प्राकृतिक मृत्यु।

अदालत में पेश की गई इस गवाही को केस का अहम मोड़ माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि फोरेंसिक साक्ष्य अक्सर ऐसे मामलों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जहां मौत के कारण को लेकर विवाद होता है।

अब अदालत अगली सुनवाई में अन्य गवाहों के बयान दर्ज करेगी। माना जा रहा है कि फोरेंसिक गवाही के बाद आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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