हरियाणा में भी फैली अरावली पर्वत श्रंखला

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Aravalli Range

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में आंदोलन की आहट, पूर्व CM हुड्डा उठाएंगे आवाज

अरावली पर्वत श्रंखला को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद हरियाणा में भी सियासी और सामाजिक सरगर्मियां तेज होती नजर आ रही हैं। अरावली सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में भी फैला हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सीधा असर प्रदेश पर पड़ना तय माना जा रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली पर्वत श्रंखला उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद अहम है। यह क्षेत्र भूजल संरक्षण, हरियाली और प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हरियाणा में पहले ही अरावली क्षेत्र में अवैध खनन, निर्माण गतिविधियों और वन भूमि के क्षरण को लेकर विवाद होते रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन मुद्दों पर फिर से बहस तेज हो गई है।

राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले को लेकर प्रतिक्रिया शुरू हो चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने संकेत दिए हैं कि वे हरियाणा में अरावली से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाएंगे। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस इसे पर्यावरण संरक्षण और प्रदेश के हितों से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर धरना-प्रदर्शन या जन आंदोलन की रूपरेखा भी तय की जा सकती है।

वहीं, पर्यावरण से जुड़े संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता भी सरकार से स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अरावली क्षेत्र को लेकर अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में पानी, हवा और जलवायु से जुड़ी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश सरकार को अपनी नीति में बदलाव करने पड़ सकते हैं। कुल मिलाकर, अरावली पर्वत श्रंखला का मुद्दा एक बार फिर हरियाणा की राजनीति और पर्यावरण बहस के केंद्र में आता दिख रहा है।

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