बाहरी जिलों की टीमें करेंगी जांच, पिछले दो साल के दस्तावेज खंगाले जाएंगे
हरियाणा में प्रॉपर्टी से जुड़ी एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) प्रक्रिया को लेकर सामने आए कथित घोटाले के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने फैसला लिया है कि इस मामले में दो जिलों में इंटरनल जांच करवाई जाएगी। जांच का जिम्मा दूसरे जिलों से गठित की जाने वाली स्वतंत्र कमेटियों को सौंपा जाएगा, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच कमेटियां संबंधित जिलों में पिछले दो साल के रिकॉर्ड की गहन समीक्षा करेंगी। इस दौरान यह देखा जाएगा कि कितनी एनओसी जारी की गईं, किन नियमों और शर्तों के आधार पर अनुमति दी गई और क्या कहीं प्रक्रिया में अनियमितता या नियमों की अनदेखी हुई। जांच के बाद जारी की गई सभी एनओसी पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लाई जा सके और भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। जांच के दौरान अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
एनओसी प्रक्रिया का सीधा संबंध जमीन, कॉलोनी विकास और निर्माण गतिविधियों से होता है। ऐसे में इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आम लोगों को भी कानूनी और आर्थिक परेशानी में डाल सकती है। यही वजह है कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बाहरी जिलों की कमेटियों को जांच सौंपने का उद्देश्य स्थानीय दबाव और प्रभाव से बचना है। इससे जांच निष्पक्ष और तथ्यात्मक रहने की उम्मीद है।
इस फैसले के बाद संबंधित विभागों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद एनओसी प्रणाली में सुधार के लिए नई गाइडलाइंस भी जारी की जा सकती हैं, जिससे भविष्य में पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
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