विशेष अनुमति पर बाहर निकला डेरा प्रमुख; सुरक्षा घेरे में सिरसा आश्रम पहुंचा
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख एक बार फिर जेल से बाहर आया है। यह उसकी 15वीं अस्थायी रिहाई मानी जा रही है, जिसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच उसे जेल से बाहर निकाला गया और विशेष काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा परिसर की ओर रवाना किया गया। रास्ते भर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया।
जानकारी के अनुसार, बाहर आते समय समर्थकों की भीड़ को दूर रखा गया और किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया था। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी को भी नियमों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
डेरा प्रमुख गंभीर आपराधिक मामलों में सजा काट रहा है। उस पर हत्या और साध्वियों के यौन शोषण जैसे संगीन आरोप साबित हो चुके हैं, जिनमें उसे लंबी सजा सुनाई गई थी। इसके बावजूद उसे इससे पहले भी कई बार पैरोल या फरलो के आधार पर जेल से बाहर आने की अनुमति मिल चुकी है। हर बार की तरह इस बार भी उसकी रिहाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार दी जा रही रिहाई से पीड़ित पक्ष और समाज में गलत संदेश जाता है। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि कानूनी प्रावधानों के तहत उसे यह सुविधा मिलती रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, रिहाई की अवधि के दौरान डेरा प्रमुख की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। उसे तय शर्तों का पालन करना होगा और किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम या सभा में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।
सिरसा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। यह मामला एक बार फिर पैरोल नीति, जेल सुधार व्यवस्था और संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक फैसलों पर बहस को हवा दे रहा है।
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