टेक प्रोफेशनल की पहाड़ों में अचानक मौत, कामकाजी दबाव पर फिर उठे सवाल

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घूमने निकले युवा की जीवनलीला समाप्त, नौकरी से जुड़े तनाव को लेकर चिंता गहरी

एक निजी कंपनी में कार्यरत युवा तकनीकी विशेषज्ञ की पहाड़ी शहर में अचानक मौत ने कॉरपोरेट सेक्टर में बढ़ते मानसिक और शारीरिक दबाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। गुरुग्राम में कार्यरत यह इंजीनियर कुछ दिनों की छुट्टी लेकर उत्तराखंड के मशहूर पर्यटन स्थल पहुंचा था। परिजनों के मुताबिक, यात्रा से पहले उसने अपने पिता को फोन कर बताया था कि वह रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर जाकर खुद को तरोताजा करना चाहता है।
बताया जा रहा है कि होटल में ठहरने के दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। साथी यात्रियों ने तुरंत मदद की कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जानकारी में दिल से जुड़ी समस्या की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। भोपाल में रहने वाले पिता का कहना है कि बेटे ने कभी गंभीर बीमारी की शिकायत नहीं की थी।
यह घटना अकेली नहीं है। हाल के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के शहरी इलाकों में युवाओं के बीच अचानक हृदयाघात के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हर महीने औसतन आठ युवा इस तरह की वजहों से जान गंवा रहे हैं। लंबे समय तक काम करना, अनियमित दिनचर्या, नींद की कमी, मानसिक दबाव और शारीरिक गतिविधियों का अभाव इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि कॉरपोरेट माहौल में काम करने वाले युवाओं को अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित जांच, संतुलित खानपान और तनाव प्रबंधन बेहद जरूरी है। कंपनियों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ावा दें।
इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता की दौड़ में कहीं युवा अपनी सेहत की कीमत तो नहीं चुका रहे। परिवार, समाज और संस्थानों—तीनों को मिलकर इस बढ़ती समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

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