किसानों का शक्ति प्रदर्शन, प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप

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farmers protest

जवाबदेही की मांग को लेकर किसान सड़कों पर, सरकार पर संरक्षण देने का आरोप

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में किसान संगठन ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान लघु सचिवालय के बाहर एकत्र हुए और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन के वरिष्ठ नेता ने राज्य में बड़े स्तर पर आर्थिक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए।

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में भारी गड़बड़ी की गई है, जिससे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है, जिस कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। किसानों का कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

किसान नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्ट तत्वों को बचाने में लगी हुई है, जबकि आम जनता और किसान वर्ग को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जाए।

इस दौरान प्रशासन को एक अल्टीमेटम भी दिया गया। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो प्रदेश स्तर पर बड़े आंदोलन की रणनीति भी बनाई जाएगी। किसानों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन उनकी अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों ने किसानों से संवाद की कोशिश की और उनकी मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि, किसान नेता ठोस कार्रवाई और लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े रहे।

यह प्रदर्शन राज्य में किसान आंदोलन की एक नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसने एक बार फिर शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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