विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्कूल प्रमुखों को सिखाए जाएंगे समय रहते पहचान के तरीके
हरियाणा में विद्यार्थियों के बीच बढ़ती मानसिक चुनौतियों और आत्मघाती प्रवृत्तियों को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की पहल पर चार जिलों के स्कूल प्रिंसिपलों को विशेष प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। यह प्रशिक्षण गुरुग्राम में आयोजित किया जाएगा, जहां उन्हें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को समझने और समय रहते जोखिम के संकेत पहचानने के तरीकों से अवगत कराया जाएगा।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां बच्चे बिना डर या झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ प्रिंसिपलों को बताएंगे कि तनाव, अवसाद, परीक्षा का दबाव, पारिवारिक समस्याएं और सामाजिक अपेक्षाएं किस तरह छात्रों के मन पर असर डालती हैं। इसके साथ ही यह भी समझाया जाएगा कि व्यवहार में आने वाले छोटे-छोटे बदलाव कैसे किसी बड़े मानसिक संकट का संकेत हो सकते हैं।
चार जिलों से चुने गए स्कूल प्रमुखों को यह भी सिखाया जाएगा कि शिक्षकों, काउंसलरों और अभिभावकों के साथ मिलकर एक प्रभावी सहयोग तंत्र कैसे बनाया जाए। प्रशिक्षण में काउंसलिंग की बुनियादी तकनीकें, छात्रों से संवाद स्थापित करने के तरीके और आपात स्थिति में तुरंत कदम उठाने की प्रक्रिया पर भी जोर दिया जाएगा। लक्ष्य यह है कि किसी भी छात्र की परेशानी अनदेखी न रह जाए।
अधिकारियों का मानना है कि प्रिंसिपल स्कूल व्यवस्था की रीढ़ होते हैं और यदि वे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग होंगे, तो इसका सकारात्मक असर पूरे संस्थान पर पड़ेगा। भविष्य में इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है, ताकि राज्य स्तर पर एक मजबूत मानसिक स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली विकसित की जा सके।
यह पहल न केवल आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने की दिशा में अहम मानी जा रही है, बल्कि इससे छात्रों में भरोसा और सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा के साथ-साथ मानसिक संतुलन पर ध्यान देना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
![]()











