इंसानियत की मिसाल, सहयोग से हुआ बेसहारा महिला का अंतिम संस्कार

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इलाज में खर्च हो गई जमा पूंजी, श्मशानघाट में चंदा जुटाकर निभाई गई अंतिम जिम्मेदारी

फरीदाबाद से मानवता को झकझोर देने वाली एक भावुक करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक गरीब महिला का अंतिम संस्कार लोगों ने आपसी सहयोग और चंदे से कराया। महिला की बीमारी के इलाज में परिवार की सारी जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी, जिसके चलते अंतिम संस्कार के लिए भी उनके पास पैसे नहीं बचे। इस स्थिति में स्थानीय लोगों और श्मशानघाट में मौजूद व्यक्तियों ने मिलकर मानवता की मिसाल पेश की।

जानकारी के अनुसार, महिला लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। इलाज के दौरान परिवार ने जो थोड़ी-बहुत पूंजी थी, वह पूरी तरह खर्च हो गई। महिला की मृत्यु के बाद परिजनों के सामने सबसे बड़ी समस्या अंतिम संस्कार की व्यवस्था को लेकर खड़ी हो गई। आर्थिक तंगी के कारण परिवार शव वाहन तक की व्यवस्था नहीं कर सका, जिससे मजबूरन महिला के शव को ठेले पर रखकर श्मशानघाट तक ले जाना पड़ा।

जब यह स्थिति श्मशानघाट में मौजूद लोगों ने देखी तो कई लोगों की आंखें नम हो गईं। बिना किसी औपचारिकता के वहां मौजूद लोगों ने तुरंत चंदा इकट्ठा करना शुरू किया। कुछ ही समय में अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक राशि जुटा ली गई, जिसके बाद पूरे सम्मान के साथ महिला का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना समाज की उस सच्चाई को भी उजागर करती है, जहां इलाज की महंगाई गरीब परिवारों को पूरी तरह तोड़ देती है। वहीं, इस मुश्किल घड़ी में आम लोगों द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता और सहयोग ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।

परिवार ने मदद करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यदि समय पर सहयोग नहीं मिलता, तो उनके लिए अंतिम संस्कार कर पाना भी संभव नहीं होता। इस घटना ने प्रशासन और समाज दोनों के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जरूरतमंदों के लिए सामाजिक और सरकारी सहायता को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।

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