एनकाउंटर में SIT की जांच से दो युवकों को मिली राहत

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SIT investigation

गलती से हिरासत में लिए गए आरोपी रिहा, मुकदमा कैंसिल और गिरफ्तारी रद्द

 

झज्जर एनकाउंटर मामले में बड़ी राहत दो युवकों के लिए आई है। विशेष जांच टीम (SIT) की जांच में यह सामने आया कि दोनों युवकों को गलती से हिरासत में लिया गया था। जांच में बाई मिस्टेक (गलती) सामने आने के बाद अदालत ने दोनों को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को भी रद्द कर दिया गया।

घटना की शुरुआत तब हुई थी जब झज्जर पुलिस को एनकाउंटर से जुड़े मामले में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। इसके आधार पर दो युवकों को हिरासत में लिया गया और उन्हें संबंधित SIT के सामने पेश किया गया। प्रारंभिक जांच में कुछ असंगतियां पाई गईं, लेकिन विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दोनों युवकों का एनकाउंटर या किसी आपराधिक घटना से कोई संबंध नहीं था।

SIT ने अपने रिपोर्ट में उल्लेख किया कि युवकों को हिरासत में लेना प्रशासनिक गलती थी और उनके खिलाफ किसी ठोस सबूत के अभाव में कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने इस रिपोर्ट के आधार पर युवकों को तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को भी निरस्त कर दिया।

पुलिस प्रशासन ने बताया कि दोनों युवकों को किसी भी तरह की असुविधा से बचाने के लिए सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में इस तरह की गलती को रोकने के लिए जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सावधान बनाया जाएगा।

स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार ने राहत व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया ने युवकों को सही समय पर न्याय दिलाया। वहीं, पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि झज्जर एनकाउंटर मामले की मूल जांच जारी है और वास्तविक आरोपियों की पहचान के लिए कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले ने एक बार फिर दिखा दिया कि जांच में सटीकता और तथ्यात्मक सबूत कितना महत्वपूर्ण है, और गलती होने पर न्यायपालिका और SIT ने उचित कदम उठाकर युवकों के अधिकारों की रक्षा की।

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