विद्यार्थियों के दल ने किया पुस्तकालय का भ्रमण

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ओडिशा : राजकीय कालेज,राउरकेला के विद्यार्थियों के एक दल ने गुरूवार को डॉ सबल टांडी और डॉ सनीराम केरकेट्टा के नेतृत्व में ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय कोरापुट के पुस्तकालय का भ्रमण किया।यहां, पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ बीएन प्रधान ने सबका स्वागत किया और इस मौके पर पुस्तकालय के सभागार में एकल व्याख्यान का आयोजन किया। श्री प्रधान ने कहा कि डॉ जेबी पांडेय के यहां ज्वाइन करने से विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियां बढ़ गई हैं और इसका श्रेय हिंदी के विद्वान कुलपति डॉ चक्रधर त्रिपाठी को जाता है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के विजिटिंग प्रो डा जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि नीति कहती है कि संसार में 7 जगहें ऐसी हैं, जहां निमंत्रण मिलने पर भी नहीं जाना चाहिए और यदि गलती से चले गए, तो वहां नहीं रहना चाहिए और यदि भूलवश वहां रह गए, तो किसी से नहीं कहना चाहिए। ऐसे वर्जित स्थान हैं। वेश्यालय, मदिरालय, जुआलय, हिंसालय, चिकित्सालय,न्यायालय और नरकालय।इनमें प्रथम चार जगहें (वेश्यालय,मदिरालय, जुआलय और हिंसालय) चक्रवर्ती सम्राट महाराज परीक्षित ने कलियुग के अनुरोध पर अपने राज्य में रहने के लिए दे दिया था।कलियुग के विशेष अनुनय, विनय और अनुरोध करने पर सोने में भी वास करने की अनुमति कलियुग को मिल गई थी,जिसका दुष्परिणाम महाराज परीक्षित को भोगना पड़ा था  और जिसका खामियाजा संसार को भोगना पड़ रहा है।वहीं, सात वांछित स्थान हैं जहां बिना निमंत्रण के भी जाना चाहिए, वहां रहना चाहिए और यदि मौका मिले तो कुछ न कुछ कहना चाहिए। ये जगहें हैं, विद्यालय (विकसित रुप महाविद्यालय, विश्वविद्यालय), पुस्तकालय सह कवितालय, अनुसंधानालय, अनाथालय, शिक्षकालय, देवालय (मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर, गुरुद्वारा)  तथा स्वर्गालय।उन्होंने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि नयी पीढ़ी को जहां जाना चाहिए, वहां जाने से कतराती है और बहाने बनाती है। लेकिन जहां नहीं जाना चाहिए वहां जाने की ताक और फिराक में रहती है और मौका लगते ही वहां पहुंच जाती है।अपना और समाज का कल्याण चाहनेवाले को इनसे बचना अपेक्षित है।

क्योंकि महाकवि तुलसी ने लिखा है :

सुत वित्त लोक ऐषणा तीनी।

केहि के मति इन्ह कृत न मलीनी।।

अर्थात् तीन ऐषणाओं (इच्छाओं) ने किसकी मति को मलिन नहीं कर दिया   :सुतेषणा,वितेषणा,और लोकेषणा अर्थात् पुत्र प्राप्ति, धन प्राप्ति और यश प्राप्ति हरेक मनुष्य की चाहत है।इनकी चाह करनेवाले को 7 वर्जित स्थानों पर जाने से परहेज करना चाहिए और वांछित जगहों पर बिन बुलाए जाना चाहिए। ऐसा करनेवालों की विजय सुनिश्चित है।उन्होंने कहा कि संसार में ज्ञान सर्वोपरि है,ज्ञान पुस्तकों में है और पुस्तकें पुस्तकालय में हैं।अतः एक विद्यार्थी को प्रत्येक दिन कम से कम दो घंटे पुस्तकालय में और दो घंटे अपने घर में एकाग्र चित होकर अध्ययन करना चाहिए। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के शिक्षक उपस्थित रहे, जिनमें डॉ संजीत कुमार दास, डॉ कपिला खेमुंदु, डॉ नूपूर, डॉ सौरभ गुप्ता, डॉ मयूरी मिश्रा, डॉ रानी सिंह, डॉ दुलुमनि तालुकदार, डॉ सौम्य रंजन दास, डॉ  फागू नाथ भोई, डॉ प्रदोष कुमार रथ, डॉ शरत कुमार पालिता, डॉ विनीता त्रिपाठी, डॉ विनय त्रिपाठी, डा वीरेन्द्र कुमार षाडंगी के नाम शामिल हैं। कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत डॉ बी एन प्रधान ने किया वहीं कार्यक्रम का संचालन डॉ कपिला खेमुंदु और धन्यवाद ज्ञापन डॉ सबल टांडी ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र -गान से हुआ।

 

 

 

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