
अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि आचार्य बलदेव महाराज तपोनिष्ठ, कर्मयोगी, महान गौभक्त, व्याकरण के सूर्य व दृढ़ ईश्वर विश्वासी थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन आर्य समाज व गौ सेवा में लगाया। आचार्य बलदेव का जीवन प्रेरणादायक है। आचार्य हमेशा से वेद, ऋषि दयानंद, आर्य समाज, गौ-भक्ति, देश, धर्म, संस्कृत, मातृ शक्ति, मानवता और प्राणी मात्र के प्रति समर्पित थे। आचार्य बलदेव ऋषि दयानंद के दिखाए मार्ग का अनुसरण करते थे। उन्होंने उनके हजारों शिष्य आज भी देश विदेश में आर्य समाज का प्रसार करते हैं। उन्होंने कहा कि अंधविश्वास वह बीमारी है जिससे हमनें अतीत में इतना कुछ गंवाया है। जब धर्म की सच्ची शिक्षा देने वाले ऋषि-मुनियों के अभाव में अज्ञान व अन्धविश्वास, पाखण्ड एवं कुरीतियां व मिथ्या परम्पराएं आरम्भ हो गईं उनके स्थान पर ढोंगी, पाखंडियों के डेरे सजने लगे तब इसका परिणाम देश की गुलामी था। इनके कारण देश को अनेक विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ा और आज भी देश की धार्मिक व सामाजिक स्थिति सन्तोषजनक नहीं है। इस स्थिति को दूर कर विजय पाने के लिए देश से अज्ञान व अंधविश्वास का समूल नाश करना जरुरी हैं। कार्यक्रम के उपरांत आयोजित विशाल ऋषि लंगर में सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
![]()











