परंपराओं के अनुरूप हुए उपस्थित, विवादित दावों को किया सिरे से खारिज
पंजाब की राजनीति और धार्मिक हलकों में चर्चा का केंद्र बनी एक अहम घटना अब पूरी हो चुकी है। राज्य के मुख्यमंत्री ने सिख समुदाय के सर्वोच्च धार्मिक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जहां उन्होंने चल रहे विवादों पर अपनी बात स्पष्ट की। इस मौके पर उन्होंने उन आरोपों को गलत बताया, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने इस धार्मिक संस्था की सर्वोच्चता को चुनौती दी है।
मुख्यमंत्री परंपराओं का पालन करते हुए नंगे पैर पहुंचे और पूरे समय सिर झुकाए रखा। उनका यह आचरण धार्मिक मर्यादाओं के सम्मान के तौर पर देखा गया। पेशी के दौरान उन्होंने कहा कि उनके बयान या कार्यों का उद्देश्य कभी भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके खिलाफ फैलाई जा रही बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला एक पुराने बयान से जुड़ा है, जिसे लेकर धार्मिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही थी। इसी के चलते उन्हें तलब किया गया था। बैठक के दौरान धार्मिक पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री की बातों को सुना और उनसे स्पष्टीकरण लिया। पेशी शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई और किसी तरह का विरोध या अव्यवस्था नहीं हुई।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है। जहां एक ओर समर्थक इसे मुख्यमंत्री की विनम्रता और धार्मिक संस्थाओं के प्रति सम्मान के रूप में देख रहे हैं, वहीं विरोधी दल इस मुद्दे को लेकर अब भी सवाल उठा सकते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री के स्पष्ट बयान के बाद विवाद के शांत होने की संभावना जताई जा रही है।
पेशी पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि वे सभी धर्मों और परंपराओं का सम्मान करते हैं और भविष्य में भी सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। इस घटनाक्रम को पंजाब में राजनीति और धार्मिक संस्थाओं के रिश्तों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।
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