गीता केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन का दर्शन है: स्वामी ज्ञानानंद

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Bhagavad Gita
सफीदों के सिटी पार्क में आयोजित गीता सत्संग में स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं,
सफीदों, (एस• के• मित्तल) : गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला व्यवहारिक जीवन-दर्शन है। उक्त उद्गार महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने प्रकट किए। वे नगर के सिटी पार्क में कृष्ण कृपा परिवार के तत्वावधान में आयोजित दिव्य गीता सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भक्ति योग आश्रम के अध्यक्ष एवं आयुर्वेदाचार्य डा. शंकरानंद सरस्वती, कैबिनेट मंत्री कृष्णलाल पंवार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली, हरियाणा गौसेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण गर्ग, हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन के पूर्व सदस्य एडवोकेट विजयपाल सिंह, पद्मश्री सम्मानित महावीर गुड्डू व आयोजक संस्था के अध्यक्ष रवि मोहन विशेष रूप से मौजूद रहे। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि निष्काम भाव से किया गया कर्म ही व्यक्ति और समाज दोनों के लिए कल्याणकारी होता है। गीता जी में 18 अध्याय व 700 श्लोक विद्यमान हैं। गीता का प्रत्येक श्लोक नि:स्वार्थ, प्रभू को समर्पित व अहंकार रहित कर्म करने की प्रेरणा प्रदान करता है। गीता केवल किसी एक धर्म विशेष की आस्था का ग्रंथ ही नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का ग्रंथ है। गीता जी में कहीं भी संकीर्णता व मत-मतांतर की बात नहीं कही गई है। गीता में सभी प्राणियों के हित की बात कही गई है। सही मानो तो गीता प्रेम, सद्भावना व सामाजिक समरसता की एक बुनियाद स्थापित करने वाला ग्रंथ है। गीता उपदेश 5160 वर्ष पूर्व कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में कौरवों व पांडवों के बीच चले युद्ध में युद्धभूमि पर दिया गया। गीता केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व का गौरव है और पूरी दुनिया के लोग गीता जी को आत्मसात करते हैं। भागवत गीता जी शांति का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। हर कोई मानसिक व सामाजिक शांति चाहता है और मनुष्य को ये दोनों चीजें गीता जी ही प्रदान कर सकती हैं। गीता के उपदेशों को अंगीकार करके ही शांति व सद्भाव स्थापित किया जा सकता है। गीता मनीषी ने कहा कि गीता में ज्ञान का अथाह सागर है, जो हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। गीता हमारे देश की धरोहर है और संस्कृति है। गीता का ज्ञान घर-घर और प्रत्येक इंसान तक पहुंचना जरूरी है। ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: का जाप करने से जीवन के कष्टों को दूर कर प्रभु श्री कृष्ण की कृपा पा सकते हैं। इस मंत्र का जाप करने से आपका मन पूरी तरह से शांत हो सकता है और आप प्रेम और भक्ति की भावना से भर जाएंगे। वहीं, इस मंत्र का जाप करने से घर की सुख समृद्धि भी बनी रहती है। आओ हम सब भी खुले मन से जियें, सबके साथ प्रेम करें, किसी से ईर्ष्या न करें, तभी हम भगवान के समीप जा सकते हैं।

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