जान-पहचान से शुरू हुआ नेटवर्क, फिर बुजुर्ग को बनाया निशाना
भिवानी में सामने आए हनीट्रैप मामले ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में पता चला है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक सुनियोजित गिरोह काम कर रहा था, जिसका गठन करीब पांच महीने पहले किया गया था। इस गिरोह में शामिल महिलाओं ने मिलकर लोगों को फंसाने और उनसे पैसे ऐंठने की साजिश रची थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी महिलाओं की आपस में पहचान पहले से नहीं थी, लेकिन उनकी मुलाकात थाने में हुई थी। वहीं से इनकी दोस्ती शुरू हुई और धीरे-धीरे यह आपराधिक योजना का रूप लेती गई। इसके बाद उन्होंने मिलकर एक ऐसे व्यक्ति को निशाना बनाने का फैसला किया, जिसे आसानी से फंसाया जा सके।
मामले में सामने आया है कि गिरोह ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को अपने जाल में फंसाने के लिए उसे एक मकान पर बुलाया। वहां उसे झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी दी गई और बदले में उससे करीब पांच लाख रुपये की मांग की गई। पीड़ित व्यक्ति घबरा गया और उसने किसी तरह इस मामले की जानकारी पुलिस को दी।
सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है या नहीं।
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था के लिहाज से गंभीर है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के बुलावे पर बिना सोचे-समझे न जाएं और ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।
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