BJP पर भारी पड़ेगा भीतरघात? — हाईप्रोफाइल सीटों पर विरोधियों से ज्यादा बागियों से जंग तेज

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उम्मीदवार चयन के बाद भड़के कार्यकर्ता और असंतुष्ट नेता

कई सीटों पर भाजपा को अपने ही घर में चुनौती

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए भीतरघात सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पार्टी जिन हाईप्रोफाइल सीटों पर विरोधी दलों से कड़ी टक्कर की उम्मीद कर रही थी, वहां अब मुकाबला अपने ही बागी नेताओं से होता नजर आ रहा है। टिकट बंटवारे के बाद असंतोष खुलकर सामने आया है और कई नेताओं ने या तो निर्दलीय मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है या विरोधी दलों से संपर्क साध लिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी के अंदर का यह असंतोष चुनावी गणित को बदल सकता है। कई जिलों में ऐसे हालात हैं जहां लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिलने से नाराजगी है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता खुले तौर पर नेतृत्व की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं। इससे हाईप्रोफाइल सीटों पर वोटों का बिखराव तय माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व लगातार असंतुष्ट नेताओं को मनाने की कोशिश कर रहा है। वरिष्ठ पदाधिकारियों को राज्यों में भेजा गया है ताकि बागी उम्मीदवारों को मनाकर पार्टी के पक्ष में किया जा सके। हालांकि, कई जगहों पर यह प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं, क्योंकि स्थानीय स्तर पर गुटबाजी गहरी जड़ें जमा चुकी है।

विपक्षी दल इस मौके का फायदा उठाने में जुटे हैं। कांग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियां बीजेपी के बागियों से संपर्क साधकर उन्हें समर्थन देने या गठबंधन जैसे प्रस्ताव रख रही हैं। इससे कई सीटों पर समीकरण पूरी तरह उलट सकते हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर भीतरघात पर नियंत्रण नहीं हुआ तो बीजेपी को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है — खासकर उन सीटों पर, जहां जीत-हार का अंतर बहुत कम होता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी अपने ही “घर की आग” को कैसे बुझाती है।

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