बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में छाया रहा जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला

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महेश कुमार सिन्हा

पटना : बिहार विधान मंडल का पांच दिवसीय संक्षिप्त शीतकालीन सत्र सोमवार को संपन्न  हो गया। इस पूरे सत्र के दौरान विधान मंडल के दोनों सदनों  में छपरा में जहरीली शराब से बड़ी संख्या में हुई लोगों की मौतों का मामला छाया रहा। विपक्षी भाजपा के सदस्यों ने हर दिन  इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने और मृतकों के आश्रितों को मुआवजे देने की मांग को लेकर विधान सभा और विधान परिषद में जम कर हंगामा किया। विधान सभा में तो कुर्सियां भी फेंकी गयी। भाजपा सदस्यों के हंगामे की वजह से लगातार दोनों सदन बाधित रहा। उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुआवजा देने से साफ इंकार कर दिया और कहा कि जो पियेगा वो मरेगा। इसपर विपक्ष ने एक मौके पर विधान सभा से वाक आउट कर अपनी नाराजगी जाहिर की। भाजपा विधयकों ने बाद में सीएम की इस्तीफे की मांग करते हुए राजभवन मार्च किया। फिर राज्यपाल से मुलाकात कर नीतीश सरकार को बर्खास्त करने तक की मांग कर डाली। इस सत्र के दौरान सदन में हंगामे के बीच ही कुछ सरकारी और विधायी काम काज निपटाये गये तथा औपचारिकतायें निभायी गयी। विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सोमवार को कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। विधानमंडल का पूरा शीतकालीन सत्र शराब की भेंट चढ़ गया। सत्र के पांचवे और आखिरी दिन भी भाजपा विधायकों ने नीतीश कुमार सरकार की शराबबंदी नीति के खिलाफ बिहार विधानसभा के बाहर पोस्टर दिखाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। पोस्टर पर सरकार पस्त, अपराधी मस्त जैसे कई नारे लिखे हुए थे। भाजपा विधायकों ने नीतीश कुमार से सारण में जहरीली शराब पीकर जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को मुआवजा राशि देने की मांग की। करीब 11.35 बजे तक विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने सदन की कार्यवाही चलाई। विधानसभा अध्यक्ष के आदेश पर एक तरफ जहां नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा सारण में शराब से मौतों के मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग को लेकर अपनी बात रख रहे थे, तो दूसरी तरफ भाजपा का हंगामा जारी रहा। हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। वहीं, भोजनावकाश के बाद विधानसभा की कार्रवाई का वहिष्कार कर भाजपा के सभी विधायक बाहर निकल गए और बौद्ध वृक्ष के पास जाकर एक मिनट का मौन रखा। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने कहा कि बोधिवृक्ष नीतीश सरकार को सद्बुद्धि दें ताकि लाशों की ढेर पर राजनीति को बंद करें। दरअसल, बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने सारण में जहरीली शराब से हुई मौत के मामले को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों को अपने स्थान पर जाने के लिए निवेदन करते रहे, लेकिन सदन में हंगामा जारी रहा। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने उनके संबंधी के ऊपर लगाये गए आरोपों का मामला सदन में उठाया। उन्होंने लखीसराय में शराब के मामले में गिरफ्तार हुए माफिया भाजपा विधायकों ने जमकर हंगामा किया। प्रश्नकाल के दौरान जैसे ही सवाल-जवाब शुरू हुआ विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए हंगामा करने लगे और वेल में पहुंच गये। भाजपा विधायक जहरीली शराब कांड में परिजनों को मुआवजा की मांग कर रहे थे। इस दौरान वेल में पोस्टर लहराते देख स्पीकर ने मार्शल से पोस्टर हटाने को कहा। विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर भाजपा सदस्यों से फोटो और पोस्टर छीना गया। इस दौरान हंगामा और रिपोर्टर टेबल पीट रहे भाजपा विधायकों से विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आप लोगों को जनता ने इसीलिए जीता कर भेजा है ? काम नहीं करना है और सिर्फ ढोलक बजाना है। विधानसभा अध्यक्ष ने हंगामा कर रहे विधायकों समझाने की पूरी कोशिश की लेकिन हंगामा बढ़ते देख अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। विरोध कर रहे विधायकों से विधानसभा अध्यक्ष का पोस्टर सदन को दिखाते हुए उन्हे जदयू का नेता बताया।

लेखक : न्यूजवाणी के बिहार के प्रधान संपादक हैं और यूएनआई के ब्यूरो चीफ रह चुके हैं

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