अंतिम संस्कार की व्यवस्था पर उठा सवाल, मानवाधिकार संस्था सक्रिय

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Caste discrimination

जाति आधारित श्मशान व्यवस्था पर केंद्र की नजर, जिला प्रशासन से तलब की जानकारी

हरियाणा के हिसार जिले से सामने आए एक मामले ने सामाजिक समानता और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि यहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जाति के आधार पर अलग-अलग श्मशान घाटों का उपयोग किया जाता है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है और जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

आयोग के अनुसार, अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील और मानवीय संस्कार में जातिगत भेदभाव संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि एक गांव में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग श्मशान घाट निर्धारित हैं और सामाजिक दबाव के कारण लोग इसका विरोध भी नहीं कर पा रहे। जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हिसार के उपायुक्त को नोटिस जारी कर पूरे मामले की तथ्यात्मक स्थिति, प्रशासन द्वारा अब तक उठाए गए कदम और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी मांगी है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में भेदभाव की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

जिला प्रशासन का कहना है कि मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित गांव से रिपोर्ट तलब की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार की नीति जातिगत भेदभाव के खिलाफ है और यदि कहीं भी इस तरह की प्रथा चल रही है तो उसे समाप्त किया जाएगा। प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया है कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान मिलना सुनिश्चित किया जाएगा।

यह मामला एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जड़ जमाए सामाजिक भेदभाव की ओर ध्यान खींचता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

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