सबूतों के अभाव में आरोप साबित नहीं, अदालत ने किया बरी
चंडीगढ़ में रिश्वत से जुड़े एक मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक सरकारी विभाग के ड्राइवर को बरी कर दिया है। यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब विजिलेंस टीम ने आरोपी को कथित तौर पर नकद राशि लेते हुए पकड़ा था। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत में पेश किए गए साक्ष्य आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए।
जानकारी के अनुसार, विजिलेंस विभाग ने आरोपी ड्राइवर को करीब 10 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उसने एक पुरानी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम करवाने के लिए कुल 40 हजार रुपये की मांग की थी। इस कार्रवाई के बाद मामला अदालत में पहुंचा, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ ठोस और पुख्ता सबूत पेश नहीं किए गए हैं। वहीं, अभियोजन पक्ष भी आरोपों को पूरी तरह से साबित करने में सफल नहीं हो सका। इसी आधार पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया।
अदालत के इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, खासकर जांच प्रक्रिया और साक्ष्य जुटाने के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में मजबूत साक्ष्य बेहद जरूरी होते हैं, तभी आरोपियों को सजा दिलाई जा सकती है।
फिलहाल, इस फैसले के बाद संबंधित विभाग और जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी नजरें टिकी हुई हैं।
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