सबूतों के अभाव में यौन अपराध के आरोपी को राहत, अदालत का बड़ा फैसला

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Chandigarh Court

कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को किया दोषमुक्त

चंडीगढ़ की एक अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। विशेष रूप से पीड़िता के माता-पिता के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए गए, जिससे पूरे मामले की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।

मामला मोहाली के एक होटल से जुड़ा बताया गया था, जहां आरोपी पर नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी और बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया।

हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पीड़िता के माता-पिता द्वारा दिए गए बयानों में समय, घटनाक्रम और परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट विरोधाभास हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में साक्ष्यों का मजबूत, स्पष्ट और एक-दूसरे से मेल खाना अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर जब मामला नाबालिग से जुड़े गंभीर अपराध का हो।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि केवल आरोप लगना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपों को ठोस साक्ष्यों से साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी है। संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना कानून का स्थापित सिद्धांत है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।

फैसले के बाद आरोपी पक्ष ने राहत की सांस ली, वहीं अभियोजन पक्ष के लिए यह मामला एक सीख के रूप में देखा जा रहा है कि जांच और गवाहों के बयानों में किसी भी प्रकार की असंगति पूरे केस को कमजोर कर सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पुलिस और अभियोजन को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और दोषी बच न पाए।

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