निर्माता कंपनी पर ₹40 हजार जुर्माना, कोर्ट ने कहा—रिटेलर की सीमित जिम्मेदारी
चंडीगढ़ की अदालत ने लिवप्रेस सस्पेंशन दवा से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने रिटेलर और विक्रेता को बरी करते हुए निर्माता कंपनी पर ₹40 हजार का जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दवा नियमानुसार लाइसेंस प्राप्त सप्लाई चैन के माध्यम से बेची गई हो और उसमें किसी प्रकार की मिलावट या गुणवत्ता संबंधी खामी पाई जाती है, तो उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होती है।
मामला उस समय दर्ज हुआ था जब संबंधित दवा के सैंपल की जांच में गुणवत्ता मानकों में कमी पाई गई थी। इसके बाद ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत निर्माता, विक्रेता और रिटेलर के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान रिटेलर और विक्रेता की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने दवा अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर से खरीदी थी और उसके बिल व रिकॉर्ड भी प्रस्तुत किए।
अदालत ने पाया कि रिटेलर और विक्रेता ने नियमानुसार रिकॉर्ड रखा था और उत्पाद की गुणवत्ता की जांच करना उनका दायित्व नहीं है, जब तक कि वे स्वयं निर्माण या मिलावट में शामिल न हों। ऐसे में उन्हें दोषी ठहराने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
वहीं, निर्माता कंपनी गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने में विफल रही, जिसके चलते उस पर ₹40 हजार का आर्थिक दंड लगाया गया। कोर्ट ने कहा कि दवा निर्माण कंपनियों को सख्त गुणवत्ता नियंत्रण अपनाना चाहिए, क्योंकि यह सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है।
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