व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए कथित साजिश, डॉ. मोहित धवन मामले में पुलिस पर उठे सवाल
चंडीगढ़ में चर्चित अपहरण प्रकरण ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। लगभग 3400 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट में ऐसे दावे सामने आए हैं, जिनसे जांच की दिशा पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। दस्तावेजों के अनुसार कथित तौर पर ‘धवन’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जिसके जरिए पूरे घटनाक्रम की योजना पर चर्चा होने का आरोप है।
यह मामला डॉ. मोहित धवन से जुड़ा हुआ है, जिन पर पहले अपहरण की साजिश में शामिल होने के आरोप लगे थे। हालांकि नई चार्जशीट में पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को लेकर कई विसंगतियों का उल्लेख किया गया है। बचाव पक्ष का दावा है कि डिजिटल साक्ष्यों की प्रस्तुति और समय-क्रम में विरोधाभास सामने आए हैं, जो पूरे मामले को संदिग्ध बनाते हैं।
चार्जशीट में कॉल रिकॉर्ड, चैट डिटेल्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का विस्तृत विश्लेषण शामिल बताया जा रहा है। कुछ हिस्सों में यह भी संकेत दिया गया है कि जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर घटनाक्रम को एक विशेष दिशा में मोड़ने की कोशिश की। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की गई।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े दस्तावेजी रिकॉर्ड की न्यायालय में गहन समीक्षा होगी। आगामी सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि प्रस्तुत साक्ष्य कितने मजबूत हैं और आरोपों की वैधता क्या है।
यह मामला अब केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी बहस का विषय बन गया है।
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