एक वर्ष में पूरा होना था डिजिटल प्लान, पांच साल बाद भी अधूरा; ₹3.24 करोड़ की राशि अटकी
Chandigarh में पुलिस की ई-बीट बुक परियोजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। यह योजना मूल रूप से एक वर्ष में पूरी की जानी थी, लेकिन अब इसे शुरू हुए लगभग पांच वर्ष बीत चुके हैं और परियोजना पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।
सूत्रों के अनुसार इस डिजिटल पहल के लिए Ministry of Home Affairs द्वारा करीब 3.24 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। उद्देश्य था कि बीट सिस्टम को तकनीकी रूप से मजबूत कर पुलिस कर्मियों की निगरानी, रिपोर्टिंग और क्षेत्रीय गतिविधियों को रियल-टाइम में दर्ज किया जा सके। लेकिन निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण न होने के कारण फंड का एक हिस्सा उपयोग से वंचित रह गया।
ई-बीट बुक का मकसद पारंपरिक कागजी बीट रजिस्टर की जगह डिजिटल प्लेटफॉर्म को लागू करना था, जिससे गश्त, अपराध की सूचना और संदिग्ध गतिविधियों का डेटा तुरंत उपलब्ध हो सके। हालांकि, तकनीकी अड़चनों, टेंडर प्रक्रिया में देरी और समन्वय की कमी को परियोजना के लंबित रहने का कारण बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन समय पर क्रियान्वयन न होने से इसका उद्देश्य प्रभावित हुआ है। प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि देरी के कारण लागत और जवाबदेही दोनों पर असर पड़ा है।
पुलिस विभाग की ओर से कहा गया है कि परियोजना को जल्द पूरा करने के प्रयास जारी हैं और तकनीकी खामियों को दूर किया जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि लंबित योजना कब तक पूरी तरह लागू हो पाती है और फंड के उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट होती है।
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