मुआवजा देने में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मार रहे हैं पलटी

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महेश कुमार सिन्हा

पटना: पलटी मारने में माहिर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब मृतकों के आश्रितों को मुआवजा देने के मामले में  भी पलटी मार रहे हैं। राज्य में अभी जहरीली शऱाब पीने से हुई करीब 100 लोगों की मौत का मामला गर्माया हुआ है। इसकी गूंज सड़क से लेकर सदन तक सुनाई  दे रही है। विपक्ष के साथ ही नीतीश सरकार को समर्थन  दे रही वामपंथी पार्टियां भी मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग सरकार से कर रही हैं। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इससे  साफ इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जो पियेगा वो मरेगा। मुआवजा देने का सवाल कहां उठता है। नीतीश कुमार के इस बयान के बाद इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि अब वह मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने के मामले में  भी पलटी मार रहे हैं। जबकि वह पूर्व में जहरीली शऱाब से मरने वालों के आश्रितों को मुआवजा दे चुके हैं। यह बात अब खुलकर सामने आ चुकी है कि छह साल पहले गोपालगंज के खजुरबन्नी गांव में जहरीली शराब कांड में 19 लोगों की मौत के बाद सरकार ने पीड़ित परिवार को 4-4 लाख रुपये  मुआवजा दिया था। ऐसे में विपक्ष की ओर से यह कहा जा रहा है कि इस मामले में एक बार फिर नीतीश कुमार की गलतबयानी सामने आ गई है। गौरतलब है कि बिहार में अप्रैल 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू हुई थी। इसके बाद 2016 के अगस्त माह में बिहार के गोपालगंज जिले के खजूरबन्नी में सबसे पहला जहरीली शराब कांड हुआ था। जिसमें  जहरीली शराब पीने से 19 लोगों की मौत हो गई थी और कम से कम 10 लोगों के आंखों की रोशनी चली गई थी। नीतीश कुमार की ही सरकार ने इस कांड के बाद मरने वालों के परिजनों को 4-4 लाख रूपये मुआवजा दिया था। मरने वाले 19 लोगों में अनिल राम भी थे। जहरीली शऱाब पीने से हुई मौत के बाद सरकार ने इनकी पत्नी अमृता को 4 लाख रू मुआवजा दिया था।  अनिल राम की पत्नी अमृता कही थी, उस दिन खजूरबानी में उनकी जिन्दगी उजड़ गई। उसको 4 लाख रूपये का मुआवजा दिया था। मुआवजे की राशि बैंक में फिक्स कर दी गई थी और और फिक्स राशि के बदले प्रत्येक पीड़ित परिवार को बैंक से 9 सौ रूपये प्रति माह की राशि दी जाती है। अब सरकारी मुआवजे से मिलने वाले 900 रूपये से ही परिवार का खर्च चल रहा है। लेकिन छपरा में इतनी बड़ी घटना के बाद नीतीश कुमार औऱ उनकी पूरी सरकार ये चीख-चीख कर कह रही है कि शराब पीने से मरने वालों को मुआवजा दिया ही नहीं जा सकता। सरकार ने न कभी पहले मुआवजा दिया और न अब देगी। नीतीश कुमार कह रहे हैं-जो पियेगा, वो मरेगा। ऐसे मे अब यही कहा जा रहा है कि गोपालगंज के खजूरबन्नी जहरीली शराबकांड में मुआवजा देने वाले नीतीश कुमार आज फिर पलटी मार रहे हैं। छपरा में मरने वाले सारे लोग बेहद गरीब पिछडे़ औऱ दलित समाज के लोग हैं। उन घरों का कमाने वाला आदमी चला गया। अब विधवा महिलायें और मासूम बच्चे बचे हैं। अगर सरकार उन्हें मदद नहीं देगी तो वे भूखे मरेंगे।

लेखक : न्यूजवाणी के बिहार के प्रधान संपादक हैं और यूएनआई के ब्यूरो चीफ रह चुके हैं

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